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रामनगरी से मिशन-2022 का आगाज कर बसपा ने चौंकाया

अयोध्या में शुक्रवार को प्रबुद्ध वर्ग गोष्ठी में नवागंतुक नेता को गदा भेंट करते बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र।

अजय कुमार

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने भले ही कभी भी अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बने, इसकी वकालत न की हो, बसपा के संस्थापक कांशीराम तो प्रभु राज की जन्मस्थली पर मंदिर की जगह कुछ और ही बनवाना चाहते थे, लेकिन बदले राजनीतिक माहौल और वोट बैंक की सियासत के चलते अब बसपा की जुबान पर भी श्रीराम मंदिर आ गया है। सभी जानते हैं कि श्रीराम मंदिर निर्माण में बसपा का रत्तीभर योगदान नहीं है लेकिन शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे सतीशचंद्र मिश्र ने यह कहकर भविष्य की राजनीति का संकेत दे डाला कि यूपी में बसपा की सरकार बनी तो श्रीराम मंदिर का निर्माण पूरा कराएगी।

बसपा भी कहने लगी है कि भगवान श्रीराम तो सबके हैं। यही नहीं पहली बार बसपा मिशन-2022 का आगाज भी प्रभु श्रीराम की नगरी अयोघ्या से कर रही है। प्रभु राम की नगरी अयोध्या से बहुजन समाज पार्टी के मिशन 2022 की शुरुआत करके बसपा क्षत्रियों और ब्राह्मणों दोनों को लुभाना चाह रही है। अयोध्या से ब्राह्मण विचार संगोष्ठी का आगाज कर दिया है। इसके पश्चात 24-25 जुलाई को अंबेडकरनगर, 26 जुलाई को प्रयागराज, 27 जुलाई को कौशांबी, 28 जुलाई को प्रतापगढ़, 29 जुलाई को सुलतानपुर में बसपा ब्राह्मण विचार संगोष्ठी आयोजित करेगी तो बसपा महासचिव और मायावती की रणनीतियों को चतुर खिलाड़ी सतीश चंन्द्र मिश्र रघुकुल के देवा और जन-जन के प्रभु रामलला के दर्शन करके क्षत्रियों के बीच भी राजनैतिक मैसेज पहुंचाने का काम करेंगे। 

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र अयोघ्या पहुंच गए हैं, जहां उन्हांने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि भगवान श्रीराम तो सबके हैं। हम भी उनका आशीर्वाद लेने आए हैं।इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। अयोध्या में हनुमान गढ़ी तथा श्रीरामलला जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद मिश्र ने कहा कि बसपा ने तो उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सबसे बड़ा गठबंधन कर लिया है।

मिश्र ने कहा कि 2022 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जनता से गठबंधन करेगी। कानपुर के बिकरू कांड में विकास दुबे के भतीजे की पत्नी खुशी दुबे की जमानत के बारे में उन्होंने कहा कि हम तो बाराबंकी जेल में बंद खुशी दुबे की हर संभव मदद करेंगे। बसपा की 29 जुलाई तक प्रदेश के पांच जिलों में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन आयोजित कराने की योजना है। इसके संयोजक सतीश चंद्र मिश्र हैं।

अयोध्या के हनुमानगढ़ी में अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी संजय दास की अगुवाई में बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा का स्वागत किया गया। महंत संजय दास ने कहा कि हनुमानगढ़ी सभी भक्तों की है। जो भी यहां आएगा, हम सभी का स्वागत करते हैं। हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं है। अयोध्या में आज से होने वाले विशाल ब्राह्मण सम्मेलन में बड़ा उलटफेर हुआ है। विशाल ब्राह्मण सम्मेलन की जगह अब बसपा विचार संगोष्ठी होगी। हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता द्वारा जिला प्रशासन से की गई शिकायत और न्यायालय की एडवाइजरी के बाद बसपा ने कार्यक्रम की रूपरेखा बदल दी है। प्रशासन ने कहा कि इसमें केवल 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति है।

गौरतलब हो, ब्राह्मण समाज को फिर से जागरूक करके बसपा 2007 के सोशल इंजीनियरिंग के पुराने फार्मूले को दोहराना चाहती है। पार्टी का दावा है कि ब्राह्मणों का हित सिर्फ बसपा सरकार में ही सुरक्षित रह सकता है। मिश्र ने बताया कि ब्राह्मण समाज के लोग अपने मान-सम्मान, सुरक्षा व तरक्की के लिए फिर से बसपा से जुड़कर सूबे में लोकप्रिय सरकार बनवाएंगे। उन्हें ऐसा विश्वास है। उनका कहना है कि यूपी में जातिगत व धार्मिक द्वेष की भावना से शोषण किया जा रहा है। इससे प्रबुद्ध वर्ग आहत है।सत्ता का 14 वर्ष का वनवास खत्म करने के लिए बसपा अनूठे अंदाज में चुनावी बिगुल फूंकने जा रही है।

2007 में सत्ता के सिहांसन तक पहुंची बसपा को पूरा भरोसा है कि ब्राह्मण ही उसके लिए फिर ब्रह्मास्त्र हो सकते हैं। सोच का समीकरण कुछ यूं है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव- 2022 में दलित-ब्राह्मण की जोड़ी मुस्लिम को भी भरोसा दिला सकती है कि हाथी में जीतने का दम है। सोशल इंजीनियरिंग का बसपा का यह दांव बेशक पुराना है, लेकिन खास बात यह है कि बसपा मुखिया मायावती भी अब भगवान राम की शरण में हैं।

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती इधर लगातार ब्राह्मण समाज को अपनत्व का संदेश देने का कोई मौका छोड़ नहीं रहीं और साथ आने का न्योता भी दे रही हैं। उनका आरोप है कि यूपी में भाजपा की सरकार बनवाने के बाद ब्राह्मण अब पछता रहे हैं। उन्हें साधने के लिए बसपा ने फिर से अपने राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को आगे किया है। दरअसल, वर्ष 2007 के चुनाव के पहले ब्राह्मण सम्मेलनों से ऐसा माहौल बना था कि बसपा के टिकट से सबसे अधिक ब्राह्मण विधानसभा पहुंचने में सफल हुए थे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)