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पूर्व MLC का दावा- यूपी, बिहार में बसाए जा रहे असम वाले घुसपैठिए

विस्फोटक हो चुकी जनसंख्या के नियंत्रण को लेकर असम और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों की पहल ने देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर नया विमर्श खड़ा कर दिया है। पक्ष-विपक्ष में लोग तमाम तरह के तर्क दे रहे हैं। मुस्लिमों के समर्थक बुद्धिजीवियों का दावा है कि यह भाजपा और आरएसएस की नीति का हिस्सा है। इससे मुस्लिम समुदाय को दबाव में लाने की नीति अपनाई जा रही है। उधर, बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य हरेंद्र प्रताप ने एक सनसनीखेज लेख में कहा है कि देश के मुस्लिम षड्यंत्रकारियों द्वारा उत्तर भारत में एक मुस्लिम गलियारा तैयार करने की योजना है, जिससे बांग्लादेश और पाकिस्तान को आपस में जोड़ा जा सके। यह गलियारा बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। इस गलियारे में मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को लाकर बसाने का काम योजनाबद्ध ढंग से किया जा रहा है।

करीब डेढ़ साल पहले जेएनयू के एक मुस्लिम छात्र नेता ने यह कहकर सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिया था कि पूर्वोत्तर और शेष भारत को जोड़ने वाले “चिकेन नेक” पर मुस्लिम आबादी को तेजी से बढ़ाना है जिससे सुरक्षा बलों के पूर्वोत्तर में प्रवेश को बाधित किया जा सके। इसे लेकर उठा बवंडर कुछ ही दिनों में तो शांत हो गया लेकिन यह सांप हो चुका था कि भारत विरोधी षड्यंत्र कार्यों के दिमाग में ऐसी कोई साजिश पलक चुकी है। यह भी गौर करने वाली बात है कि चीन की निगाह भी चिकन नेक के करीब पहुंचने की रही है। ऐसे में हरेंद्र प्रताप का यह दावा महत्वपूर्ण हो जाता है।

एक दैनिक अखबार ‘दैनिक जागरण’ में लिखे अपने लेख में हरेंद्र प्रताप ने कहा है कि इस गलियारे में मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को लाकर बसाने का काम योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है बांग्लादेश से असम में आए मुस्लिम घुसपैठियों के खिलाफ वहां चले जन आंदोलन के बाद इस्लामिक षड्यंत्रकारियों ने उन्हें बंगाल, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में भेजना शुरू कर दिया है।

हरेंद्र ने लिखा है कि कुछ वर्ष पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश विशेषकर कैराना से हिंदुओं के पलायन की बात हुई थी तो वोट के सौदागरों ने इसका खंडन किया। सच्चाई यह है कि विगत जनगणना में कैराना में हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय से आधा यानी 9.19 प्रतिशत था। मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि हिंदू से 3 गुना यानी 29.81% थी। एक अनुमान के मुताबिक 2001-2011 के बीच बंगाल से करीब 35 लाख हिंदुओं का पलायन हुआ है। ओवैसी के अपने शहर हैदराबाद की स्थिति भी कश्मीर घाटी से कम नहीं है। 2001 में हैदराबाद की हिंदू जनसंख्या 2121963 थी जो 2011 में घटकर 2046051 रह गई।

उन्होंने लिखा है कि ओवैसी उत्तरी भारत में भी अपने मिशन के लिए निकल पड़े हैं। बिहार के सीमावर्ती जिले में जैसे ही उन्हें राजनीतिक सफलता मिली, वैसे ही वहां भी कश्मीर घाटी को दोहराने की शुरुआत हो गई। पूर्णिया जिला की बायसी विधानसभा मुस्लिम बहुल है, जहां से इस बार ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। इसी वर्ष मई में इस विधानसभा क्षेत्र में दलितों की बस्ती को मुसलमानों के एक समूह ने जला दिया। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम घुसपैठ और हिंदुओं के पलायन के बाद अब हिंदुओं को मुसलमान बनाने के षड्यंत्र का भी पर्दाफाश हो गया है। इसके तार पाकिस्तान के साथ ही अन्य मुस्लिम देशों से भी जुड़ रहे हैं। इस्लामिक ताकतें घुसपैठ और हिंदू पलायन के साथ प्रस्तावित गलियारे में आतंकवाद को भी बढ़ावा दे रही हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई नेपाल के रास्ते उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल में सक्रिय हैं। जून 2000 में आई एक रिपोर्ट में भारत नेपाल सीमा पर तेजी से बन रहे मदरसों और मस्जिदों से सावधान रहने की चेतावनी दी गई थी। यह मदरसा और मस्जिद ऐसी जगहों पर बनाई जा रही है जहां से भारत की सामरिक तैयारियों पर न केवल नजर रखी जा सके बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरे में डाला जा सकता है।

गौरतलब है कि यूपी एटीएस ने पिछले दिनों ही लखनऊ से अलकायदा के भारतीय संगठन गजवा-तुल-हिंद से जुड़े दो आतंकियों और उनके सहयोगियों को पकड़ा है। इन आतंकियों और उनके सहयोगियों की जड़ें भी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में फैली हुई है। कश्मीर तक इनके तार जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।

असमान विस्तार

यूपी में मुस्लिम आबादी की वृद्धि पूरे प्रदेश में एक समान नहीं है। यह मुस्लिम पट्टी वाले जिलों जैसे मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%), गोंडा (42.20%) है।

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Ranvijay Singh

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