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पश्चिम बंगाल की हिंसा पर हमलावर हुई भाजपा, #NHRC ने कहा- #CBI जांच और राज्य से बाहर हो सुनवाई

विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट कोलकाता हाई कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने हमलावर रुख अपनाया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को गलत ठहराने की कोशिशें शुरू कर दी है।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि 2 मई के बाद पश्चिम बंगाल में जिस तरह हिंसा हुई, निर्दोष नागरिकों की हत्या की गई, महिलाओं के साथ दुराचार किया गया। ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल में आज संविधान का नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष का राज है। ममता बनर्जी ने आंखे बंद कर लीं और TMC के गुंडों को खुली छूट दे दी।

मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट 13 जुलाई को न्यायालय के समक्ष रखी गई। रिपोर्ट के अनुसार मानव अधिकार आयोग को 1979 शिकायत प्राप्त हुईं, पश्चिम बंगाल में हमारे 15,000 भाई-बहनों को प्रताड़ित किया गया। 8,000 ऐसे लोग हैं जिन्होंने​ हिंसा, दुराचार किया और कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बता दें कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कोलकाता हाई कोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कहा है कि अगर राज्य में हिंसा नहीं रोकी गई तो भारत जैसे महान देश में गणतंत्र की हत्या हो जाएगी। हिंसा दूसरे राज्यों में फैलने लगेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान दुष्कर्म, हत्या, आगजनी जैसे सैकड़ों मामले सामने आए जिनकी शिकायतें तक दर्ज नहीं की गई हैं। पुलिस पर लोगों को विश्वास नहीं है। उनकी शिकायत सुनी नहीं जा रही है। ज्यादातर मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

अगर कुछ गिरफ्तारियां हुई भी है तो आरोपित जमानत पर रिहा हो गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोग को मिली शिकायतों को पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है ताकि प्राथमिकी दर्ज हो। उधर, समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार अधिकांश आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

आयोग की रिपोर्ट में हत्या और दुष्कर्म के मामले की जांच सीबीआई से कराने और सुनवाई राज्य से बाहर करने की सिफारिश की गई है। कहा गया है कि हिंसा में अन्य गंभीर अपराधों के लिए विशेष जांच टीम गठित की जाए जिसकी मॉनिटरिंग कोर्ट करे। पीड़ितों को आर्थिक सहायता के साथ पुनर्वास, सुरक्षा और आजीविका की व्यवस्था कराई जाए।

यह सिफारिश भी की गई है कि रिटायर्ड जज की देखरेख में मॉनिटरिंग कमेटी बने और हर जिले में एक स्वतंत्र अफसर आब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाए। जांच का आदेश जल्दी हो, क्योंकि दिन-ब-दिन स्थिति खराब होती जा रही है। पीड़ितों को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। रिपोर्ट में कुख्यात अपराधियों की सूची में तृणमूल सरकार में मंत्री ज्योति मलिक, विधायक पार्थ भौमिक, विधायक शौकत उल्ला, विधायक खोकन दास, तृणमूल नेता जीवन साहा, उदयन गुहा, नंदीग्राम में ममता बनर्जी के पोलिंग एजेंट रहे सुफियान समेत कई प्रमुख नेताओं के नाम दर्ज हैं।