Home » भारतीय नौसेना को मिला 10वां पनडुब्बियों का दुश्मन पी-8आई विमान
देश न्यूज

भारतीय नौसेना को मिला 10वां पनडुब्बियों का दुश्मन पी-8आई विमान

अमेरिकी बोइंग कंपनी ने भारतीय नौसेना को दसवां लंबी दूरी का समुद्री टोही पनडुब्बी रोधी पी-8आई विमान सौंप दिया है। आने वाले समय में अभी तीन और विमान नौसेना को मिलने वाले हैं। पहली बार 2013 में नौसेना में शामिल किए जाने के बाद से अब तक 30 हजार घंटों से ज्यादा की उड़ान भर चुके हैं। भारतीय नौसेना पी-8 आई खरीदने वाली बोइंग कंपनी की पहली अंतरराष्ट्रीय ग्राहक थी और आज अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर इन विमानों के बेड़े का संचालन करती है। पी-8 आई का संचालन यूएस नेवी, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स और यूनाइटेड किंगडम की रॉयल एयर फोर्स भी करती है।

अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर इन विमानों के बेड़े का संचालन करती है भारतीय नौसेना

अमेरिका के पी-8 आई एयरक्राफ्ट ‘हंटर’ नाम से प्रसिद्ध हैं। हिन्द महासागर क्षेत्र में सभी महत्वपूर्ण चोक पॉइंट्स पर निगरानी रखने के लिए भारत ने वर्ष 2012 में अमेरिका से 12 पी-8 आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों का 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर में सौदा किया था। इनमें से 8 टोही विमानों की आपूर्ति 2013 में की जा चुकी है, जिन्हें तमिलनाडु के अरक्कोनम में तैनात किया गया है। अत्याधुनिक रडार से लैस ये विमान जरूरत पड़ने पर चीनी सीमा पर लद्दाख और पूर्वोत्तर में भी भेजे जाते हैं। गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुए हिंसक संघर्ष के बाद शहीद और घायल भारतीय सैनिकों को लाने के लिए भी इन्हीं विमानों को भेजा गया था।

30 हजार घंटों से ज्यादा भरी है उड़ान

इसके बाद 2019 में पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए नौसेना ने चार और लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों का ऑर्डर बोइंग कंपनी को दिया। इस ऑर्डर में से पहला निगरानी विमान भारतीय नौसेना ने 18 नवम्बर, 2020 को मिला। इसे भारत के पश्चिमी तट पर गोवा में हंसा नेवल बेस पर तैनात किया गया है। पूरे हिन्द महासागर और अरब सागर में चीन या पाकिस्तान की पनडुब्बियों का शिकार करने के लिए अब तक नौसेना के पास कुल 09 पी-8 आई एयरक्राफ्ट थे जो अब तक 30 हजार घंटों से ज्यादा की उड़ान भर चुके हैं। अब कंपनी ने भारतीय नौसेना को दसवां लंबी दूरी का समुद्री टोही पनडुब्बी रोधी पी-8आई विमान सौंप दिया है। समुद्री निगरानी और खोज एवं बचाव अभियान के लिए एक और गश्ती विमान मिल जाने से भारतीय नौसेना के बेड़े की ताकत बढ़ी है।

भारत के पास बोइंग कंपनी से अभी 6 और पी-8 आई विमान खरीदने का विकल्प

कंपनी के बयान में कहा गया है कि बेजोड़ समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं के अलावा पी-8 आई को आपदा राहत और मानवीय मिशनों के दौरान सहायता के लिए तैनात किया जा सकता है। बोइंग ने भारतीय नौसेना के फ्लाइट क्रू, स्पेयर पार्ट्स, ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट और फील्ड सर्विस रिप्रेजेंटेटिव सपोर्ट का प्रशिक्षण देकर भारत के बढ़ते पी-8 आई बेड़े का समर्थन किया है। बोइंग के एकीकृत रसद समर्थन ने न्यूनतम संभव लागत पर नौसेना के बेड़े को सक्षम किया है। भारत के पास बोइंग कम्पनी से अभी छह और पी-8 आई विमान खरीदने का विकल्प है, जिस पर 2021 के अंत में बातचीत होगी।

विमान में होंगी ये खासियत

अमेरिकी कंपनी बोइंग ने पनडुब्बियों का शिकार करने के लिए इन विमानों को मार्क-54 तारपीडो, मार्क-84 डेप्थ चार्ज और घातक बमों से लैस किया है। इसके अलावा इस विमान में एजीएम-84 हार्पून एंटी शिप मिसाइलें भी लगाई गई हैं। पी-8 आई को कैरियर बैटल ग्रुप की सुरक्षा के लिए भी तैनात किया जा सकता है। पी-8 आई में मैग्नेटिक अनोमली डिटेक्शन सिस्टम (मैड) लगा है जो पानी के अंदर छिपी पनडुब्बियों को खोज निकालता है। इसके अलावा इसमें कई ऐसे रडार लगे हैं जो लंबी दूरी तक नजर रखने और जासूसी करने में सक्षम हैं। यह विमान 789 किमी प्रतिघंटा की गति से करीब 40 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।

बोइंग कंपनी के 2019 में हुए अनुबंध में प्रशिक्षण और सहायता पैकेज की भी शर्त रखी गई थी। इसके मुताबिक कंपनी तमिलनाडु के अरक्कोनम में आईएनएस राजाली पर प्रशिक्षण सहायता, डेटा हैंडलिंग केंद्र बना रही है। इसके अलावा कोच्चि, केरल के नेवल इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिकल टेक्नोलॉजी में एक माध्यमिक रखरखाव प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। यह नया जमीन पर आधारित प्रशिक्षण केंद्र भारतीय नौसेना के चालक दल को कम समय में मिशन दक्षता बढ़ाने की अनुमति देगा, जबकि विमान पर प्रशिक्षण के समय को कम करने के परिणामस्वरूप विमान की उपलब्धता में वृद्धि होगी।

About the author

Ranvijay Singh

Add Comment

Click here to post a comment