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अफगानिस्तान से लौटते अमेरिकी सैनिक और भारत की मोहनी कूटनीति

प्रमोद शुक्ल

ऊपर चित्र में आप जो देख रहे हैं वह आजाद भारत की चंद्र कुंडली है और इस कुंडली के अनुसार पिछले दिनों 23 अप्रैल से 9 जुलाई 2021 तक भारत की चंद्रमा की महादशा में शनि की अंतर्दशा और गुरु की प्रत्यंतर दशा थी। यह समय बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। इस दौरान भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जो बड़े बदलाव आए हैं, उसके सुखद नतीजे पूरी दुनिया को अगले दो तीन दशक तक देखने को मिल सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर यदि पैनी नज़र रखते हैं तो आपने ऐसी तमाम खबरें जरूर पढ़ी होंगी कि इसी दौरान भारत की विदेश नीति में कुछ आमूलचूल परिवर्तन नजर आए… इसी के तहत बताया जा रहा है कि एक तरफ तो भारत अफगानिस्तान में अपने सैनिक और युद्ध के साजो सामान भेज रहा है और दूसरी तरफ यह भी चर्चा है कि भारत के विदेश मंत्री ने तालिबानियों से भी कुछ गोपनीय वार्ता की है। खबरों के पीछे कितनी सच्चाई है यह तो भविष्य में धीरे-धीरे सामने आ ही जाएगा परंतु यह सिर्फ भारत की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में ही बहुत बड़ा बदलाव नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के नजरिए से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रणनीति में जो बदलाव आ रहे हैं उसका एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू भी है।

तालिबानों का इतिहास तो जगजाहिर है ही कि पहले सोवियत संघ को पटखनी देने के लिए अमेरिका ने ही उसे हर तरह की मदद देकर ‘भस्मासुर’ बनाया था, आज उसी अमेरिका को बीस साल तक अपनी भद पिटाने ‌के बाद मुंह में कालिख लगाकर अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

इस बड़े बदलाव को जब हम भारत की कुंडली को निगाह में रखते हुए परखने की कोशिश करते हैं तो बहुत ही रोचक सवाल पैदा होता है कि क्या भारत की भूमिका अगले कुछ वर्षों तक दुनिया के लिए उस #मोहनी जैसी होने जा रही है जिसने नृत्य करके #भस्मासुर को उसके असली अंजाम तक पहुंचाया था ?

भारत की कुंडली और वर्तमान दशाओं को देखते हुए मेरा विश्वास है कि हां, भारत अपनी इस भूमिका को बहुत ही मजबूती और आत्मविश्वास के साथ निभाने के लिए ताल ठोक कर मैदान में कूद पड़ा है‌। वर्तमान महादशा चंद्रमा की है, जो कि स्वगृही है। अभी-अभी बीती शनि की अंतर्दशा पर गौर करिए, वह शनि दूसरे स्थान के स्वामी सूर्य से अस्त है। अर्थात सप्तमेश और अष्टमेश शनी को सूर्य महाराज परास्त किए हुए हैं। इसी दौरान से गुरु की प्रत्यंतर दशा पर गौर करिए.. यह गुरु चतुर्थ स्थान में बैठ कर के दसवें भाव और दसवें भाव के स्वामी मंगल पर अपनी पूरी शुभ दृष्टि डाल रहा है। ऐसा गुरु जोकि भारत की इस कुंडली के अनुसार भारत का भाग्य विधाता है, नौवें स्थान का स्वामी है‌ तो वर्तमान दशाओं से मुझे पूरा विश्वास है कि भारत की कूटनीति ना सिर्फ भारत के नए उत्थान को बहुत बड़ी ताकत देगी, बल्कि दुनिया को भी बहुत राहत पहुंचाएगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ज्योतिषाचार्य हैं।)

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Ranvijay Singh

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