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अमर, साही, ई-मेधा, सीटीआरआई और आरएमआईएस पोर्टल लॉच कर आयुष बनेगा `बलवान`

भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति के तहत शोध, चिकित्‍सा शिक्षा से संबंधित पांच पोर्टल जारी कर आयुष मंत्रालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया। एक ऑनलाइन कार्यक्रम में आयुष मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) किरेन रिजिजू ने पांच पोर्टलों का लोकार्पण किया और सीसीआरएएस के चार प्रकाशनों का विमोचन किया।

इनमें सीटीआरआई में आयुर्वेद डेटासेट, अमर यानी आयुष मैन्यूस्क्रिप्ट्स एडवांस्ड रिपॉज़िटरी, साही यानी शोकेस ऑफ आयुर्वेद हिस्टोरिकल इम्प्रिंट्स, आरएमआईएस यानी रिसर्च मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम और ई्-मेधा पोर्टलों के जारी होने से अब आयुर्वेद की प्राचीन पांडुलिपियों, ग्रंथों तक पहुंच और उनका डिजीटल माध्यम में रखरखाव, आयुर्वेद में शोध आदि को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिल सकेगा।

आयुष मंत्री किरेन रिजिजू ने पांच पोर्टल विकसित किए जाने को ऐतिहासिक बताया और भारतीय डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि देश के लोगों की स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा की इस महत्‍वपूर्ण योजना में आयुष भी बेहद अह़म भूमिका निभाएगा। मंत्री ने कहा कि पुरातत्व विभाग और सीसीआरएस के समन्वय से आयुष के तहत किए जा रहे काम भारतीय परंपरागत ज्ञान में नए आयाम जोड़ रहे हैं। प्रत्येक भारतीय को देश के परंपरागत ज्ञान, विरासत पर गर्व करना चाहिए। सभी पोर्टल के विकास को आयुष मंत्री ने ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और अहम उपलब्धि बताया और कहा कि इससे पूरे विश्‍व के साथ भारतीय परंपरागत ज्ञान को साझा करना और अधिक आसान होगा।

सीटीआरआई पोर्टल में आयुर्वेद के डेटासेट के जारी होने से अब आयुर्वेद के तहत किए जा रहे क्‍लीनिकल परीक्षणों को आयुर्वेद की शब्‍दावली में ही शामिल किया जा सकेगा। इससे पूरे विश्‍व में अब आयुर्वेद के तहत किये जा रहे क्‍लीनिकल परीक्षणों को और अधिक आसानी से देखा जा सकेगा। आरएमआईएस पोर्टल को आयुर्वेद में शोध और अनुसंधान से संबंधित समस्याओं के एकल खिड़की व्यवस्था के तहत समाधान के रूप मे विकसित किया गया है।

ई मेधा पोर्टल को एनआइसी के ई-ग्रंथालय प्‍लेटफार्म से जोडा गया है। इससे इस पोर्टल के जरिए भारतीय परंपरागत चिकित्सा शास्त्र की 12 हजार से अधिक किताबों तक शोधकर्ताओं सहित अन्‍य की पहुंच हो सकेगी।

एएमएआर पोर्टल में भारत और विश्‍व के अन्‍य पुस्‍ताकालयों, लोगों के व्यक्तिगत संग्रहों में शामिल आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और सोआ-रिग्पा से संबंधित दुर्लभ दस्‍तावेजों की जानकारी दी गई है।

साही पोर्टल में डिजिटल माध्यम में आयुर्वेद से संबंधित दस्‍तावेजों, शिलालेखों, पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं आदि को प्रदर्शित किया गया है।

ऑनलाइन समारोह में नेशनल रिसर्च प्रोफेसर भूषण पटवर्धन ने कहा कि सभी पोर्टल का विकास केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के समन्‍वय का अनुपम उदाहरण है। उन्‍होंने कहा कि भारत की परंपरा बेहद मजबूत है और लगातार हो रहीं खोजों से इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं।

चार हजार साल पहले भी भारत में थी शल्य क्रिया

हाल ही में पुरातत्‍व सर्वे में कश्‍मीर और तेलंगाना में मिले अवशेषों से जाहिर हुआ कि भारत में करीब चार हजार साल पहले भी शल्‍य चिकित्‍सा हुआ करती थी। आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुष मंत्रालय की ओर से भारतीय परंपरागत ज्ञान से संबंधित चिकित्सा पद्धतियों, दस्‍तावेजों को डिजिटाइज करने के प्रयासों की जानकारी दी और कहा कि लगातार यह कोशिश हो रही कि आयुष से संबंधित हर जानकारी को डिजीटल प्लेटफार्म पर लाया जा सके।

नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के चेयरमैन वैद्य जयंत देवपुजारी ने आयुर्वेद के तहत प्राचीन ग्रंथों की खोज पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र में ही एक लाख से अधिक प्राचीन ग्रंथों के होने का अनुमान है। भारतीय पुरातत्व सर्वे (एपीग्राफी) के निदेशक डा मुनिरत्‍तनम रेड्डी, आयुष मंत्रालय के विशेष सचिव प्रमोद कुमार पाठक आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सीसीआरएएस के महानिदेशक डा एन. श्रीकांत ने सभी का स्‍वागत।

समोराह में आयुष मंत्री स्‍वतं. प्रभार किरन रिजिजू ने सीसीआरएएस के चार प्रकाशनों का भी विमोचन किया। इसमें एशिया में सोआ-रिग्पा को प्रोत्‍साहित करने पर आयोजित सेमिनार की प्रोसिडिंग, आयुर्वेद में वर्णित महत्वपूर्ण अनाजों की जानकारी का संग्रह, ड्रग एवं कॉस्मेटिक अधिनियम 1940 के शेड़यूल-1 में शामिल की गई किताब आयुर्वेद संग्रह (यह किताब अभी तक केवल बंगाली में ही उपलब्‍ध थी) और भोजन तथा जीवन शैली की जानकारी देने वाली किताब पथ्‍यापथ्‍य शामिल हैं।

पांचों पोर्टलों की विशेषताएं

सीटीआरआई पोर्टल में इस आयुर्वेदिक डेटासेट के शामिल हो जाने से आयुर्वेद आधारित चिकित्सीय परीक्षणों को दुनिया भर में साख भरी पहचान मिलेगी। सीटीआरआई विश्व स्वास्थ्य संगठन के इंटरनेशनल क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म के तहत तैयार किया गया क्लीनिकल ट्रायलों का प्राथमिक रजिस्टर है। इसलिए सीटीआरआई में शामिल हुए इस आयुर्वेदिक डेटासेट से आयुर्वेद के क्षेत्र में होने वाले क्लीनिकल ट्रायलों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सीय शब्दावली का प्रयोग वैश्विक स्तर पर मान्य होगा।

आईसीएमआर की मदद से सीसीआरएस द्वारा विकसित आरएमआईएस यानी रिसर्च मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम पोर्टल आयुर्वेद आधारित पढ़ाई करने वालों तथा शोधार्थियों के लिए बहुत ही मददगार होगा। विषय विशेषज्ञों की मदद से छात्र/शोधार्थी को अपने अध्ययन और शोध में महत्वपूर्ण मदद निशुल्क मिल सकेगी।

ई-मेधा पोर्टल में नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर की मदद से ई-ग्रंथालय प्लेटफार्म  में संग्रहीत 12000 से भी अधिक भारतीय चिकित्सीय विरासत संबंधी पांडुलिपियों और पुस्तकों का कैटलॉग ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगा।

अमर यानी आयुष मैन्यूस्क्रिप्ट्स एडवांस्ड रिपॉज़िटरी पोर्टल एक डिजिटल डैशबोर्ड है जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा से जुड़ी पाण्डुलिपियों के देश-दुनिया में मौजूद खजाने के बारे में जानकारी मौजूद रहेगी।

साही यानी शोकेस ऑफ आयुर्वेद हिस्टोरिकल इम्प्रिंट्स पोर्टल में पुरा-वानस्पतिक (आर्कियो-बोटैनिकल) जानकारियों, शिलालेखों पर मौजूद उत्कीर्णनों और उच्च स्तरीय पुरातात्विक अध्ययनों की मदद से आयुर्वेद की ऐतिहासिकता के प्रमाण दुनिया के सामने आते रहेंगे।