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NCR में फिर भ्रष्टाचार, CBI ने एपीओ लवकुश पर दर्ज किया केस, ED भी कर रही तीन जांच

उत्तर मध्य रेलवे भ्रष्टाचार को लेकर फिर चर्चा में है। सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रयागराज रेलवे मंडल के असिस्टेंट पर्सनल ऑफिसर एपीओ लव-कुश के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोप है एपीओ वे-बिल लवकुश ने फर्जी बिलों के जरिए करीब एक करोड़ रुपए हड़प लिए। लवकुश के साथ सरकारी धन हड़पने में दो अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आई है। भ्रष्टाचार को लेकर उत्तर मध्य रेलवे इसके पहले भी कई बार चर्चा में रहा है। इनमें से तीन मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय ने भी शुरू कर दी है।

आरोप है कि लवकुश ने असिस्टेंट लोको पायलट नरेश सिंह के बैंक खाते की डिटेल में फेरबदल किया और एक निजी बैंक में खोले गए खाते का नंबर चढ़ा दिया गया। इसके बाद फर्जी बिलों के जरिए करीब एक करोड़ रुपए उसी निजी बैंक के खाते में जमा किए गए। फिर, उस रकम को दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर कर रकम हड़प ली गई। इसके अलावा नरेश सिंह समेत दो कर्मचारियों के मूल वेतन में भी फेरबदल कर सरकारी धन का गबन किया गया।

बताते हैं कि करीब साल भर पहले वेतन बिल सेक्शन में केंद्रीय व्यवस्था की गई थी। हर महीने यहां से करोड़ों रुपए वेतन रूप में जारी होते रहे हैं। इसी दौरान एपीओ लवकुश पे-क्लर्क प्रफुल पांडे और कुछ अन्य ने वेतन जारी करने के दौरान हेरफेर शुरू कर दिया। प्रकरण रेलवे विजिलेंस तक पहुंचा। विजिलेंस ने जांच शुरू की। शुक्रवार को सीबीआई ने भी तफ्तीश की और कुछ फाइलों को भी जब्त कर लिया। मामले में डीआरएम मोहित चंद्रा ने स्थानीय मीडिया से कहा है कि सीबीआई और विजिलेंस की टीम प्रकरण की जांच कर रही है जो भी दोषी पाया जाएगा, कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि उत्तर मध्य रेलवे में भ्रष्टाचार का मामला पहली बार सीबीआई के सामने नहीं आया है। इसके पहले रेलवे भर्ती सेल और रेलवे भर्ती बोर्ड में भी व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की सीबीआई जांच हुई है। प्रयागराज मंडल में सिग्नल विभाग में एक अफसर कुछ साल पहले रंगे हाथ भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े जा चुके हैं। प्रयागराज डिवीजन में वित्त विभाग के एक अफसर भी पांच करोड़ रुपये का हेरफेर करने में फंस चुके हैं। रेलवे में ऐसे मामलों की संख्या थोक में है।

सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तर मध्य रेलवे के तीन प्रकरणों की जांच शुरू कर दी है। इसमें सिग्नल विभाग के उन अफसर का मामला भी शामिल है जो रंगे हाथों पकड़े गए थे। सीबीआई के शिकंजे में आए रेल भर्ती सेल के तत्कालीन चेयरमैन के खिलाफ भी जांच शुरू की गई है। ईडी जल्द ही दीनों मामलों में पूछताछ शुरू कर सकती है।