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बंगाल में हुई हिंसा की शिकार मानवाधिकार आयोग ने सौंपी रिपोर्ट

विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा की जांच के लिए पहुंची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम भी हिंसा का शिकार होने बाद आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कोलकाता हाई कोर्ट को सौंप दी है। अब अदालत 2 जुलाई को इस मामले में सुनवाई करेगी। मानवाधिकार आयोग ने चुनाव बाद हुई हिंसा में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामले की जांच की है।

कोलकाता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश जिंदल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ बंगाल में चुनाव बाद हिंसा का आरोप लगाने वाली कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने कई तल्ख टिप्पणियों के बाद एनएचआरसी के अध्यक्ष को टीम गठित कर हिंसा से जुड़ी शिकायतों की जांच करने और प्रभावित इलाकों का दौरा कर 30 जून तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग की टीम ने सीलबंद लिफाफे में अदालत को रिपोर्ट सौंप दी है।

वकील ने कहा है कि यह अंतिम रिपोर्ट नहीं है और समिति के सदस्यों ने अब तक केवल 168 स्थानों का दौरा किया है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट की कोई प्रसारित नहीं की जाएगी। हम पहले रिपोर्ट देखेंगे और फिर तय करेंगे कि प्रसारित करना है या नहीं। एक अधिकारी ने बताया कि राजीव जैन की अध्यक्षता वाली समिति और एनएचआरसी के कई दलों ने बंगाल के विभिन्न इलाकों का दौरा किया और शिकायतों की सच्चाई का पता लगाया है।

कोलकाता हाई की हाईकोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति पी मुखर्जी न्यायमूर्ति हरीश टंडन न्यायमूर्ति सोमेन सेन और न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार शामिल हैं

गौरतलब है कि सोमवार को कोलकाता में जांच के दौरान एनएचआरसी की टीम पर भी अराजकतत्वों ने पत्थर फेंके थे रास्ता रोक लिया था। इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने ममता सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। हालांकि, अभी इस मामले की जानकारी नहीं है कि जांच टीम ने कोलकाता में अपने ऊपर हुए हमले का तथ्य भी रिपोर्ट में शामिल किया है या नहीं।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने बुधवार को कहा है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के संदर्भ में कमेटी का गठन किया गया था। उसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। चुनाव के बाद 25 लोगों की हत्या हुई हैं। 15,000 हिंसा की घटनाएं हुई और 7,000 महिलाओं के ऊपर अत्याचार हुआ है।