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बार एसोसिएशन से 40 लाख रुपये की कर वसूली में आयकर विभाग को HC का नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने आयकर विभाग के खिलाफ दो याचिकाएं दाखिल की हैं। दोनों याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। जस्टिस मुनीश्वरनाथ भंडारी एवं जस्टिस अजय त्यागी की दो सदस्यीय पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। यूनियन ऑफ इंडिया एवं आयकर विभाग को अपना पक्ष रखने के लिए 3 सप्ताह में काउंटर लगाने का आदेश हुआ है। मामले में अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से कोर्ट में कर एवं वित्त मामलों के विशेेषज्ञ डॉ पवन जायसवाल पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक याचिका कर निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए अवैध रूप से वसूले गए लगभग 40 लाख रुपये की वापसी से संबंधित है। इसमें आयकर विभाग ने धारा-144 के अंतर्गत एक पक्षीय कर आरोपित किया था। साथ ही वसूली भी कर ली। दूसरी याचिका कर निर्धारण वर्ष 2016-17 के लिए अभियोजित की गई है। इसमें नोटिस भेजकर आयकर विभाग ने पुनर्निर्धारण करने के लिए रिटर्न फाइल करने का दबाव बनाया है।

प्रकरण की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में चिंता व्यक्त की। बतया कि कोर्ट के संज्ञान में है कि 100 से अधिक्ता, जो एसोसिएशन के सदस्य थे, कोरोना महामारी संक्रमण के कारण उनकी मृत्यु हो गई है। इतना बड़ा आर्थिक भार भी एसोसिएशन पर है।

कोर्ट ने कहा कि हम और रेस्पांडेंट अधिवक्ता भी बार एसोसिएशन के सदस्य हैं/रहे हैं। अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह आश्वासन भी दिया कि अब आयकर विभाग द्वारा की गई कार्यवाही उच्च न्यायालय के संज्ञान में आ गई है।

बहस के दौरान बार एसोसिएशन के कर सलाहकार व कर विशेषज्ञ डॉ पवन जायसवाल ने कहा कि किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने से पहले आयकर विभाग को यह अवश्य देख लेना चाहिए कि बार एसोसिएशन की आय पर कर लगाना चाहिए या नहीं। साथ ही बार एसोसिएशन की आर्थिक स्थिति का आकलन भी करना चाहिए। कोर्ट से यह भी कहा कि यदि इसी प्रकार पुनर्निर्धारण होता रहा तो अवैधानिक कर व अर्थदंड देते-देते बार एसोसिएशन का खजाना खाली हो जाएगा। इस पर रोक लगनी चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार के अध्यक्ष अमरेंद्रनाथ सिंह ने कहा कि मामले को शीघ्र निपटाकर आयकर विभाग से रिफंड दिला दिया जाए, जिससे अधिवक्ता सदस्यों को आर्थिक सहायता जारी रहे। एसोसिएशन की तरफ से अजय सिंह, रामानुज तिवारी एवं अमिताभ अग्रवाल तथा सरकार की तरफ से गौरव महाजन ने अपना पक्ष रखा।

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Ranvijay Singh

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