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कश्मीर में परिसीमन तय, महामंथन में 370 पर चर्चा नहीं, शिकायतें जरूर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जम्मू-कश्मीर के सर्वदलीय नेताओं की साढ़े तीन घंटे तक चली महाबैठक का नतीजा सीधे तौर पर तो सामने कुछ नहीं आया लेकिन यह साफ हुआ कि राज्य में परिसीमन जल्द होने वाला है। परिसीमन के बाद राज्य विधानसभा के चुनाव की संभावना बन सकती है। बैठक के बाद मीडिया के सामने लगभग सभी नेताओं ने अपना पक्ष रखा। हालांकि, पीडीपी नेता मुजफ्फर हुसैन बेग के बयान से निष्कर्ष के निकट पहुंचा जा सकता है। यह जरूर हुूआ कि 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से हटाई गई धारा-370 और 35ए पर कोई चर्चा नहीं हुई। हां, कश्मीरी नेताओं ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी शिकायत जरूर दर्ज कराई।

PDP नेता मुजफ्फर हुसैन बेग ने कहा कि बैठक बहुत शानदार हुई। मैंने कहा कि 370 का मामला सु्प्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट धारा 370 के मामले पर फ़ैसला करेगा। मैंने धारा 370 कि कोई मांग नहीं रखी। बेग ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद मैंने कहा कि 370 ख़त्म करने का फ़ैसला जम्मू-कश्मीर विधानसभा के द्वारा होना चाहिए। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्ज़ा दिलाने की मांग सभी दलों ने की। PM ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा दिए जाने पर सीधे कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा पहले परिसीमन हो।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जम्मू और कश्मीर के भविष्य पर चर्चा की गई और परिसीमन अभ्यास और शांतिपूर्ण चुनाव संसद में किए गए वादे के अनुसार राज्य का दर्जा बहाल करने में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं। जम्मू-कश्मीर पर आज की बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। सभी ने लोकतंत्र और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

पाकिस्तान से बात क्यों? महबूबा मुफ़्ती ने दिया तर्क

बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर कहा कि पाकिस्तान के साथ बात की जानी चाहिए। हालांकि इसके लिए उन्होंने तर्क भी दिया. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि 370 को बहाल करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने कहा, “पांच अगस्त 2019 को असंवैधानिक तरीक़े 370 को हटाया वह वहां के लोगों को मंज़ूर नहीं है। हम प्रजातांत्रिक, संवैधानिक तरीक़े से उसकी बहाली की लड़ाई लड़ेंगे। ये हमें पाकिस्तान से नहीं मिला था। इसके अलावा हमने कहा कि आप चीन के साथ बात कर रहे हैं जहां लोगों की भागीदारी नहीं है। अगर जम्मू कश्मीर के लोगों को सुकून मिलता है तो आपको पाकिस्तान से बात करनी चाहिए। हमारा व्यापार बंद है. उसे लेकर बात की जानी चाहिए। मैंने बैठक में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग धारा 370 को रद्द होने से नाराज़ है। हम जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को फिर से बहाल करेंगे। इसके लिए हम शांति का रास्ता अपनाएंगे। इस पर कोई समझौता नहीं होगा।

महबूबा ने कहा, “लोगों पर यूएपीए लगाया जाता है, सख्ती लगाई जाती है उसे बंद किया जाना चाहिए. जेलों में जो राजनीतिक कैदी हैं उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। हमारे प्राकृतिक संसाधनों की हिफाजत की जानी चाहिए। जम्मू कश्मीर के लोग बहुत तंग हैं. वो अगर ज़ोर से सांस लेते हैं तो भी उन्हें जेल में रख दिया जाता है. ये बंद होना चाहिए।”

उन्होंने ये भी कहा कि व्यापारी, पर्यटन, हॉर्टिकल्चर के लोगों को पैकेज दिया जाना चाहिए।

उमर अब्दुल्लाह ने क्या कहा?

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के ख़िलाफ़ अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से कश्मीर के लोगों के साथ विश्वास बहाली के लिए क़दम उठाने को कहा।

बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा, “5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को हम नहीं मानते। सुप्रीम कोर्ट में ये बात आ जाए तो हम संपूर्ण राज्य को लेकर अपनी बात रखेंगे।”

उमर ने कहा, “हम 370 पर प्रजातांत्रिक तरीक़े से अदालत में अपना पक्ष रख कर इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई लड़ेंगे। जम्मू-कश्मीर और केंद्र के दरम्यान विश्वास टूट चुका है। उस विश्वास को बहाल करना प्रधानमंत्री का कर्तव्य है। उसके लिए उन्हें कदम उठाने चाहिए। हमारी बातें उन्होंने अच्छे से सुना।”

उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा दिया जाए। पूर्ण राज्य का दर्जा. बैठक में मौजूद सभी लोगों से प्रधानमंत्री ने परिसीमन की प्रक्रिया में शामिल होने की बात की लेकिन कुछ नेताओं ने इस पर संदेह व्यक्त किया। हम जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों की तरह देखना चाहते हैं।”

उमर ने बताया, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की राज्य का दर्जा बहाल करना और जल्द से जल्द चुनाव कराना उनकी प्राथमिकता हैं। ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी कहा कि राज्य का दर्जा पहले दिया जाना चाहिए फिर चुनाव होने चाहिए। हालांकि, इस पर प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा।”

“370 पर चर्चा नहीं की गई”

बैठक के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री मुज़फ़्फ़र बेग ने कहा, “बैठक में सरकार ने आर्थिक विकास की बात की। सबसे अधिक परिसीमन की बात की गई। अनुच्छेद 370 पर शिकायत तो लोगों ने की लेकिन यह मामला कोर्ट में है इसलिए इस पर कोई चर्चा नहीं की गई।

बीजेपी नेता कविंद्र गुप्ता ने कहा, “बैठक में जम्मू कश्मीर के उज्जवल भविष्य पर चर्चा हुई। सभी नेताओं ने वहां चुनाव की बात की। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि वहां परिसीमन की प्रक्रिया के बाद चुनाव होंगे।”

बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अल्ताफ़ बुखारी ने कहा, “आज अच्छे माहौल में वार्ता हुई। सभी ने विस्तार से अपनी बात रखी है। पीएम और गृहमंत्री ने सबकी बातें सुनीं। पीएम ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया ख़त्म होने पर चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी।”

कांग्रेस ने पांच मांगें रखी

कांग्रेस की तरफ से ग़ुलाम नबी आज़ाद इस बैठक में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “हमने बताया कि जिस तरह से पूर्ण राज्य का दर्जा हटाया गया वो नहीं किया जाना चाहिए था। हमने पांच बड़ी मांगे रखी हैं। हमने पूर्ण राज्य का दर्जा जल्दी दिए जाने की मांग रखी। साथ ही ये भी मांग की कि वहां जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव करवाए जाने चाहिए। इसके अलावा हमने वहां के लोगों के लिए डोमिसाइल की गारंटी देने की मांग की। हमने सरकार से कहा कि वो कश्मीर के पंडितों को वापस लाएं। साथ ही हमने राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की। 80% पार्टियों ने कहा कि 370 का मामला सुप्रीम कोर्ट में है।”

एक दिन पहले हुई परिसीमन आयोग की बैठक

गुपकार नेताओं के दिल्ली आने से एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग ने बैठक की जिसमें वहां की विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन और सात नई सीटें बनाने को लेकर विचार विमर्श किया गया।

बताया गया है कि इस वर्चुअल मीटिंग में जम्मू-कश्मीर के सभी 20 उपायुक्तों ने भाग लिया, जिसमें विधानसभा सीटों को भौगोलिक रूप से अधिक सुगठित बनाने के तरीक़े के बारे में जानकारी एकत्र की गई।

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि परिसीमन की प्रक्रिया के तहत जम्मू-कश्मीर में कुछ विधानसभा सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया जाना है। इस कवायद के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सीटें 83 से बढ़ कर 90 हो जाएंगी।

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Ranvijay Singh

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