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कश्मीरी नेताओं संग 3.30 घंटे का पीएम मोदी ने किया महामंथन, परिसीमन के बाद होंगे चुनाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर को लेकर महामंथन खत्म हो चुका है। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस महाबैठक के परिणामों को लेकर पूरा देश बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है। बैठक के बाद मीटिंग में मौजूद नेताओं ने मीडिया से बातचीत की।

इस दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम, मुजफ्फर बेग ने कहा कि बैठक में केंद्र सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर में हुए विकास की बात की गई। जम्मू-कश्मीर में चुनाव के बारें में हुए सवाल पर मुजफ्फर बेग ने बोला कि परिसीमन के बाद ही चुनाव होंगे। नए परिसीमन के लिए प्रक्रिया चल रही है। धारा-370 की समाप्ति पर उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसलिए उस पर कोई बात नहीं हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजधानी में जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं के साथ एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नेशनल कांफ्रेंस के नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती, गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, कश्मीर के भाजपा नेता रविंदर रैना और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।

5 अगस्त, 2019 के बाद यह पहली ऐसी बैठक है जबकि केंद्र ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का फैसला किया था। बैठक से पहले नेशनल कांफ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर में कहा था कि वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि वह उनकी चिंताओं के स्पष्ट समाधान की उम्मीद करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के जरिए सभी मुद्दों को सुलझाया जा सकता है। इस बीच, कल चुनाव आयोग ने केंद्र शासित प्रदेश में 90 विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में जम्मू-कश्मीर में अपने प्रतिनिधियों और उपायुक्तों के साथ आभासी चर्चा की ही। भाजपा नेता जम्मू-कश्मीर के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। भाजपा नेता जम्मू क्षेत्र में 25 विधानसभा क्षेत्रों की बढ़ोत्तरी चाहते हैं, जिससे जम्मू और कश्मीर में आबादी के अनुपात में सीटों की हिस्सेदारी हो सके।