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देश के एक तिहाई मुसलमान मानते हैं कि वैक्सीन उनकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत है – सर्वे

भारत के लगभग एक तिहाई मुसलमानों को लगता है कि कोविड वैक्सीन उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल नहीं हैं। जबकि, 54.6 प्रतिशत मुसलमानों ने कहा कि टीके उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुकूल हैं। आईएएनएस सी वोटर कोविड ट्रैकर में यह बात सामने आई है। ट्रैकर के अनुसार, अनुसूचित जनजाति समुदाय में 19.4 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक मिल चुकी है। अब तक 19.6 फीसदी लोग पहली और 10.4 फीसदी लोगों ने दूसरी डोज लगा ली है। अभी 52.4 फीसदी लोग वैक्सीन लगवाने की इच्छा भी रखते हैं। 6.1 फीसदी ऐसे लोग हैं जो उहापोह के शिकार हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि जागरूकता बढ़ने पर वैक्सीन को धर्म से जोड़कर देखने वाले 11 फीसदी लोगों की सोच में परिवर्तन हो सकता है।

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सर्वे के अनुसार 12.9 फीसदी मुस्लिमों ने वैक्सीन की पहली डोज और 4.4 फीसदी ने दूसरी डोज भी ले ली है। 5.3 फीसदी अब भी अनिश्चय की स्थिति में हैं कि उन्हें वैक्सीन लगवाना चाहिए या नहीं। हिन्दुओं में एसटी वर्ग में 17.9 फीसदी वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते हैं। 11.5 फीसदी ऐसे हैं जो अब भी अनिश्चय की स्थिति में हैं।

एससी में भी 12.9 फीसदी वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते हैं। 5.8 फीसदी अधर में हैं क्या करें और क्या न करें। 57.1 फीसदी ने अभी लगवाई नहीं है लेकिन वह वैक्सीन लगवाने के पक्षधर हैं। 16.3 फीसदी एसी ने पहली और 7.8 फीसदी ने दूसरी डोज लगवा ली है। इस सर्वे के अनुसार पिछड़े सवर्णों में 25.3 फीसदी ने वैक्सीन की पहली और 11.9 फीसदी ने दूसरी डोज ले ली है। 53.6 फीसदी ने लगवाई तो नहीं लेकिन लगाने के पक्षधर हैं। सिर्फ 5.6 फीसदी ही ऐसे हैं जो वैक्सीन लगवाने के पक्ष में नहीं हैं। वैक्सीन के प्रति नकारात्मक विचार रखने वालों में सबसे कम संख्या पिछड़े सवर्णों की ही है। वजह, सबसे शिक्षित तबके के रूप में गिने जाने वाले ईसाइयों में भी 8.8 फीसदी ऐसे हैं जो यह मानते हैं कि वैक्सीन लगवाना उनके धर्म के खिलाफ है।

वैक्सीनेशन कराने में सबसे आगे ईसाई समुदाय है। अब तक करीब 32.7 फीसदी ने वैक्सीन की पहली डोज और 12.9 फीसदी ने दूसरी डोज लगा ली है। वैक्सीन लगवाने में दूसरे नंबर पर सिख समुदाय है। इसमें 30.6 फीसदी ने पहली डोज और 8.2 फीसदी ने दूसरी डोज ली है। 39.6 फीसदी वैक्सीन लगवाने की तैयारी में हैं। 16.1 फीसदी इसे धर्म के विपरीत मान रहे हैं।

आईएएनएस और सी-वोटर्स ने देशभर के अलग-अलग राज्यों में 43032 लोगों के बीच सर्वे किया है। दावा है कि इसमें -3 से -5 फीसदी के बीच आंकड़ों में हेरफेर होना संभव है। फिलहाल, देशभर में 11 फीसदी ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं जो वैक्सीन को धर्म से जोड़कर देखते हैं और इसे न लगवाने की बात करते हैं।

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Ranvijay Singh

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