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सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इजरायल और म्यांमार पर केंद्र सरकार के विवेक पर उठाए सवाल

भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार की इजरायल और म्यांमार को लेकर अपनाई गई नीति पर सवाल खड़े किए हैं। स्वामी ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक विवेक की शक्ति खो दी है। दोनों देशों के मामलों में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

बेबाकी से अपनी बात रखने वाले सुब्रह्मण्यम स्वामी ने रविवार की सुबस ट्वीट कर मोदी सरकार की दोनों देशों के प्रति नीति को लेकर हमला किया। ऐसा माना जा रहा है कि स्वामी अब पहले की तरह मोदी सरकार के समर्थक नहीं रहे। कई मुद्दों पर वह सरकार की आलोचना कर चुके हैं। इस ट्वीट को भी स्वामी का मोदी सरकार की विदेश नीति के खिलाफ माना जा रहा है। स्वामी इजरायल के आक्रामक रवैये के समर्थक माने जाते हैं। म्यांमार में भी वह चीन की बढ़ती दखल के खिलाफ सरकार को चौकन्ना करते रहे हैं।

स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि यह मोदी सरकार द्वारा लोकतांत्रिक विवेक की कमी को चौंकाने वाला है कि हमने चीन समर्थक बर्मी सेना द्वारा म्यांमार में लोकतंत्र की हत्या की निंदा और आंग सान सूकी की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र के वोट में भाग नहीं लिया। हमने इजरायल पर और अब म्यांमार से परहेज किया। क्या हमने अपनी विवेक शक्ति खो दी है?

बता दें कि इजरायल के खिलाफ गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ किए गए आक्रामक हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्ताव लाया गया था। भारत ने इसमें इजरायल का साथ नहीं दिया। भारत मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रकरण में मुस्लिम देशों ने मिलकर इजरायल की घेराबंदी की। स्वामी का तर्क है कि म्यांमार में जनता का उत्पीड़न कर रही सेना चीन समर्थक है। सेना देश में लोकतंत्र की हत्या कर रही है। लोकतंत्र समर्थक आंग सान सूकी की गिरफ्तारी की गई है। इसके खिलाफ आए प्रस्ताव के पक्ष में भारत को मतदान करना चाहिए था।