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दुल्हन लेकर लौटते ही जकड़ ली ‘बीमारी’, सुनील की संदिग्ध मौत से उपजे कई सवाल

राजेन्द्र सिंह

प्रयागराज। अभी हाथ की मेंहदी का रंग फीका भी नहीं पड़ा था कि गुंजा के माथे की बिंदिया और मांग की सिंदूर उजड़ गई। ससुराल में दो ही रात गुजारी थी। जिस दिन वह दुल्हन बनकर पति सुनील कुमार के घर पहुंची, उसी दिन उसके पति की दिमागी हालत बिगड़ गई। दो ही दिन बाद पति की मौत से वह गहरे सदमे में है। मानो उसकी दुनिया ही उजड़ गई हो। सुनील की मौत दिखने में सामान्य है लेकिन सवाल हजार हैं।

हीरालाल ने अपने इकलौते बेटे की शादी उतरांव थाना क्षेत्र के सरायइस्माइल गांव निवासी गुलाब की तीन बेटियों में सबसे बड़ी बेटी गुंजा के साथ तय किया था। रविवार को बड़े धूमधाम से बारात लेकर गया। खुशी खुशी बहू को लेकर वह घर आया। उसी दिन बेटे की तबीयत अचानक खराब हो गई। सुनील बहकी-बहकी बातें करने लगा। घरवाले और रिश्तेदार सब परेशान हो गए। उन्हें लगा कि सुनील के ऊपर किसी भूत प्रेत की छाया आ गई है। वे उसका झाड़-फूंक कराने में लगे रहे। इधर, गुंजा बार-बार पिता को फोन कर सुनील की दिमागी हालत के बारे में बताती रही।

विवाह के पहले सुनील बिल्कुल ठीक था। अचानक उसे यह कैसी बीमारी हो गई, किसी के समझ में नहीं आया। शादी के दूसरे दिन मंगलवार की शाम घर से अचानक सुनील के गायब हो जाने पर सब घबरा गए। सुनील की हर संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई किंतु कहीं उसका पता नहीं चला। इधर गुंजा भी अपने कमरे में बैठी पति का इंतजार करती रही। बुधवार की सुबह सुनील के मौत की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया। गुंजा बार-बार बेसुध हो जा रही थी उसके मायके से आई महिलाएं उसे संभालने में लगी थी। सुनील ऐसा कदम उठा लेगा यह किसी को विश्वास नहीं हो रहा है।

यहां मिली लाश, संदिग्ध मौत

रामनाथपुर रेलवे स्टेशन के जैतपुर रेलवे क्रासिंग के पास बुधवार की सुबह सरायइनायत थाना क्षेत्र के फतूहा गांव निवासी हीरालाल के इकलौते बेटे सुनील कुमार (27) की लाश संदिग्ध दशा में मिली। बताते हैं कि तीन दिन पहले रविवार को उतरांव थाना क्षेत्र के सरायइस्माइल गांव निवासी गुलाब की बेटी गुंजा से शादी हुई थी। सोमवार की शाम उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने पर परिजन प्रेत बाधा समझ झाड़-फूंक कराने लगे। लेकिन उसे आराम नहीं लगा। मंगलवार की सुबह एक बार फिर हीरालाल अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ झाड़-फूंक कराने उसे लेकर हंडिया गया, किंतु उसे आराम नहीं मिला। वहां से समधी गुलाब के बुलाने पर हीरालाल बेटे को लेकर उसके ससुराल पहुंच गया।

बताते हैं कि यहां झाड़-फूंक के बाद सुनील को आराम लग गया और दोपहर में हीरालाल बेटे को लेकर घर चला आया। उसी दिन शाम को अपने दो दोस्तों के साथ सुनील फतूहां बजार टहलने गया था। दोस्तों के साथ वह वापस घर के करीब तक जरूर आया लेकिन उसके बाद फिर कहां चला गया यह पता नहीं चला। सुनील के परिजन और रिश्तेदार उसे पूरी रात जगह जगह तलाशते रहे। बुधवार की सुबह रेलवे लाइन के करीब उसके शव मिलने की खबर पर परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने राजकीय रेलवे पुलिस को ट्रेन से धक्का लगने पर हुई मौत की लिखित सूचना दी।

घर से 4 किलोमीटर दूर रेलवे लाइन के पास मिले शव की शिनाख्त हाथों में लगी मेहंदी और पैरों में लगे रंग की वजह हुई। बुधवार की सुबह गांव के ही जनार्दन कुशवाहा किसी काम से हनुमानगंज बाजार आया था। रेलवे लाइन के पास लाश मिलने की खबर पर वह देखने वहां पहुंच गया। हाथों में मेहंदी और पैरों में लगे रंग देख उसने इसकी खबर गांव में भी दी। इसके बाद परिजन घटनास्थल पर पहुंचे।

इस मौत से कई सवाल उपजे हैं। आखिर शादी के पूर्व पूरी तरह स्वस्थ सुनील की तबियत दुल्हन के डोली से उतरते ही कैसे खराब हो गई? परिजन झाड़फूंक के चक्कर में ही क्यों पड़े रहे? इलाज क्यों नहीं कराया? रेलवे लाइन के किनारे क्या करने और क्यों गया था? युवती और युवक के परिजन क्या कोई बात छिपा रहे हैं?

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Ranvijay Singh

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