Home » चुनावी मुद्दे की तलाश तो नहीं, राम मंदिर जमीन घोटाले का जिन्न?
उत्तर प्रदेश न्यूज

चुनावी मुद्दे की तलाश तो नहीं, राम मंदिर जमीन घोटाले का जिन्न?

अयोध्या स्थित निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर परिसर के विस्तार की जमीन खरीद में घोटाले का आरोप दूसरे ही दिन छिन-भिन्न होता दिख रहा है। यह पूरा प्रकरण घोटाले से ज्यादा जमीन बिक्री की दलाली के लेन-लेन का है, जिसमें रियल स्टेट से जुड़े ब्रोकर, नेता शामिल बताए जा रहे हैं। बताते हैं जिस दिन रजिस्ट्री हुई, लखनऊ से भी कुछ अफसर अयोध्या पहुंचे थे। पूरी रजिस्ट्री अफसरों की निगरानी में हुई है।

तर्कों, तथ्यों और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों की पड़ताल के दौरान साफ होता दिख रहा है कि विधानसभा चुनाव-2022 के लिए मुद्दों के लिए परेशान विपक्ष ने राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे की रकम को भ्रष्टाचार के लिए इस्तेमाल का मुद्दा उठाकर लोगों की भावनाओं को उभारने की कोशिश जैसी लगती है। ट्रस्ट का दावा है कि जमीन की खरीद बाजार दर से की गई और उसने जो भी भुगतान किया है वह बैंकिंग प्रणाली के जरिए किया गया है।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक व राज्य मंत्री रहे पवन पांडे ने जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय की मिलीभगत से जमीन खरीद में 16.5 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। शाम होते-होते लखनऊ में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे लपक लिया। संजय ने आरोप लगाया कि रविमोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी ने कुसुम पाठक से 2 करोड़ रुपये में जमीन की रजिस्ट्री शाम 7.10 बजे कराई। इसके ठीक पांच मिनट बाद वही जमीन जन्मभूमि ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में खरीद ली। 5.50 लाख रुपये प्रति सेंकेंड की दर जमीन का महंगा होना सवाल खड़े करता है।

अयोध्या में की गई पड़ताल में सामने आया कि रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी ने कुसुम पाठक से जमीन के लिए 17 सितंबर 2019 को ही रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया था। 2 करोड़ रुपये में तय हुए सौदे के लिए 50 लाख रुपये अग्रिम दिए गए थे। शेष रकम एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार तीन वर्ष में देना था।

गौरतलब है कि 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से बाबरी मस्जिद विवाद में श्रीराम मंदिर के पक्ष में फैसला आया। इस फैसले के पहले और बाद में अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर आ गया। अयोध्या और फैजाबाद शहर के आसपास की जमीन के दाम 5-6 गुना तक बढ़ चुके हैं। जबकि, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के पहले मंदिर के आसपास की जमीन के दाम काफी कम थे।

जमीन की कीमतें बढ़ने की वजह यह हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों ने अयोध्या के लिए बड़ी संख्या में परियोजनाओं का ऐलान कर रखा है। कई परियोजनाओं पर काम भी शुरू हो चुके हैं।विकास प्राधिकरण बड़ी कालोनी के विकास पर काम कर रहा है। बड़ी संख्या में होटल, धर्मशाला, निजी कालोनियों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से निजी निवेशक भी पहुंचने लगे हैं। बिकाऊ जमीन से ज्यादा खरीदार बाजार में हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले अयोध्या के रियल स्टेट बाजार की स्थिति इसके उलट थी। ऐसे में खुले बाजार को दो हिस्सों में बांटकर देखने पर स्थिति साफ हो जाती है।

सत्ता और विपक्ष के नेताओं की सांठगांठ भी कम नहीं

अयोध्या में चर्चा आम है कि मेयर ऋषिकेश उपाध्याय रियल स्टेट के बड़े खिलाड़ी हैं। जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल रवि तिवारी उनका निकट संबंधी है। वहीं, सुल्तान अंसारी, आरोप लगाने वाले सपा विधायक पवन पांडे का प्यादा बताया जाता है। पवन पांडे बालू खनन से जुड़े रहे हैं, यह कोई रहस्य नहीं है। अखिलेश सरकार के दौरान मंत्रिमंडल से उन्हें अपनी इन्हीं कारगुजारियों के कारण बाहर होना पड़ा था। जिस जमीन पर विवाद छिड़ा, वह कुसुम पाठक परिवार की भी नहीं है। कुसुम पाठक का परिवार भी जमीन खरीद-फरोख्त के धंधे से जुड़ा है। उन्होंने भी दशकभर पहले उसे एक साधु से खरीदी थी।

रियल स्टेट के जानकार बताते हैं कि जमीन के सौदे में यह सामान्य घटना है। ऐसा अक्सर होता है कि जमीन के वास्तविक मालिक से ब्रोकर (दलाल) रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर कागजात हासिल कर लेते हैं। खरीदार मिलने पर सौदे की रकम का लेनदेन होता है। हालांकि, इस पूरी सौदेबाजी में मेयर ऋषिकेश उपाध्याय की प्रमुख भूमिका मानी जा रही है। ट्रस्ट पदाधिकारियों और जमीन विक्रेताओं के बीच सौदेबाजी की कड़ी उन्हें ही बताया जा रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जमीन के इस सौदे में कानूनी रूप कोई गड़बड़ी नहीं दिखती।

रजिस्ट्री दफ्तर की भूमिका संदेह के घेरे में

सामान्यतौर पर रजिस्ट्री दफ्तरों में शाम 5 बजे के बाद आम लोगों के रजिस्टर्ड एग्रीमेंट की कोशिशों को भी अगले दिन के लिए टाल दिया जाता है। परंतु, रियल स्टेट के ब्रोकर्स के लिए देर रात तक भी रजिस्ट्री दफ्तर खुलता है और एग्रीमेंट होते हैं। इस प्रकरण में भी शाम सात बजे के बाद दोनों अभिलेख रजिस्टर्ड किए गए। साथ ही पहली रजिस्ट्री में स्टॉप की चोरी का मामला भी उठ सकता है। वजह, जमीन की मालियत 5.80 करोड़ रुपये आंकी गई है। जबकि जमीन 2 करोड़ में रजिस्ट्री की गई है।

उधर, भारतीय जनता पार्टी दिल्ली इकाई की प्रवक्ता नीतू डबास ने रविवार शाम को ही ट्वीट कर आरोप लगाया कि श्रीराम मंदिर जन्मभूमि को बदनाम करने एवं झूठ का सहारा लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की केजरीवाल के सांसद संजय सिंह की साजिश थी। टूलकिट के जरिए इसकी स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी। नीतू ने कहा कि संजय सिंह एक अलग स्क्रिप्ट में पूरी AAP नेशनल आईटी टीम को पहले निर्देश देता है कि यूपी AAP SM (सोशल मीडिया) टीम योगी सरकार की SM का मुकाबला कर पाने में असमर्थ है। इसलिए AAP की नेशनल टीम टूलकिट को पोस्टर के जरिये इस तरह से प्रसारित करे ताकि मीडिया को यह खबर दिखानी पड़े।