Home » चिराग के हाथ से निकली लोजपा? पशुपतिनाथ बने संसदीय दल के नेता
न्यूज राजनीति

चिराग के हाथ से निकली लोजपा? पशुपतिनाथ बने संसदीय दल के नेता

रामविलास पासवान के निधन के बाद संकटों से गिरी लोक जनशक्ति पार्टी नई मुसीबतों में पड़ गई है। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान पार्टी में अकेले पड़ गए हैं। पार्टी के छह लोक सभा सदस्यों में से पांच ने विद्रोह कर दिया है। चिराग पासवान के चाचा और हाजीपुर के सांसद पशुपति कुमार पारस लोजपा संसदीय दल के नए नेता चुन लिए गए हैं। माना जा रहा है कि पशुपतिनाथ मोदी कैबिनेट में जगह पा सकते हैं। घर से उठा यह विद्रोह चिराग पासवान के लिए किसी सदमे से कम नहीं होगा।

लोजपा में हुई इस फूट के बीज बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ही पड़ गए थे, जब पार्टी ने जनता दल यू का विरोध करते हुए चुनाव लड़ा और मात्र एक सीट जीतने में सफल हुई। तब, लोजपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर आग उगली। जदयू के भारी दबाव के कारण भाजपा ने चिराग से दूरी बना ली। रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुई मोदी कैबिनेट में लोजपा कोटे की सीट को भरने के लिए भाजपा ने चिराग पासवान के नाम का प्रस्ताव किया था लेकिन जदयू ने विरोध कर इसमें भी अड़ंगा लगा दिया।

जदयू का साफ संदेश था कि बिहार में चिराग या नीतीश कुमार में से किसी एक को चुनना होगा। भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ चलना पसंद किया। साथ ही चिराग पासवान से दूरी बना ली। पहले संभावना जताई गई थी कि लोजपा कोटे की मंत्रिमंडल में रिक्त हुई सीट को जदयू से भरा जाएगा। परंतु, पर्दे के पीछे दूसरी खिचड़ी पकने के कारण यह सीट खाली रही। माना जाता है कि बिहार विधान सभा चुनाव के दौरान लोजपा के विरोध के कारण ही जदयू की सीटें कम रह गईं और उसे पूरी तरह भाजपा पर निर्भर हो गई। जदयू को यह टीस पीड़ा दे रही थी।

लोजपा के इस विघटन के पीछे जदयू के ही एक प्रभावशाली सांसद का योगदान माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि जदयू की सिफारिश पर पशुपतिनाथ जल्द ही मोदी सरकार की कैबिनेट में स्थान पा सकते हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि इस फूट के पीछे भाजपा का भी योगदान है। वजह, चिराग पासवान और राजद नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक खिचड़ी पक रही थी।