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राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन खरीद में 16 करोड़ के घोटाले का आरोप, सपा के पूर्व विधायक ने कहा – दस्तावेजी सुबूत, जांच हो

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों पर राम मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन में 16.5 करोड़ रुपये के घोटाले का सनसनीखेज आरोप लगा है। यह जमीन पिछले दिनों ही पिछले दिनों ही ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में खरीदी है। समाजवादी पार्टी के अयोध्या से पूर्व विधायक पवन पांडे ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में रजिस्ट्री की कॉपियों को लहराते हुए आरोप लगाया कि अयोध्या नगर निगम के मेयर ऋषिकेष उपाध्याय और ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र जमीन की जमीन की खरीद-फरोख्त में गवाह के रूप में दर्ज हैं। कांग्रेस नेताओं और पत्रकारों ने भी सोशल मीडिया पर पवन पांडे के वीडियो और रजिस्ट्री के कुछ अंशों को शेयर करते हुए कहा है कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए चंदे की रकम को भ्रष्टाचार में लुटाया जा रहा है। इसकी जांच की जानी चाहिए।

पवन पांडे ने कहा कि धर्म के नाम पर लूट की गई है। पहले जमीन बाबा हरिदास और उनके परिवार के नाम थी। 18 मार्च 2021 को उन्होंने 2 करोड़ रुपये में जमीन रविमोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के नाम रजिस्ट्री की। 10 मिनट में ही रविमोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी ने ट्रस्ट के नाम 18.5 करोड़ रुपये में जमीन की रजिस्ट्री कर दी। इस सौदे में 17 करोड़ रुपये आरटीजीएस की गई है। दोनों खरीदारी में अनिल मिश्र ट्रस्ट के सदस्य और मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह है इस ट्रस्ट पर राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कौन की आपात परिस्थिति थी कि 2 करोड़ रुपये वाली जमीन को खरीदने के लिए ट्रस्ट को 10 मिनट में ही जमीन के दाम बढ़ाकर 18.5 करोड़ रुपये देने पड़े। इसकी जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ललितेश पति त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने 16.5 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। असंख्य लोगों गाढ़ी खून-पसीने की कमाई से आस्था केंद्र के राम मंदिर निर्माण के लिए दान दिया।

टीवी पत्रकार रोहिनी सिंह ने ट्वीट कर कहा कि अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह रविमोहन तिवारी के निकट संबंधी हैं? जिन्होंने सुल्तान अंसारी के साथ मिलकर 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन को कुछ ही मिनटों में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दिया। ऋषिकेश उपाध्याय दोनों लेनदेन के गवाह हैं।

कहा यह भी जा रहा है कि जमीन का एग्रीमेंट 3 साल पहले 2 करोड़ रुपए में हुआ था। राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन की तलाश तेज हुई तो 18 तारीख को एग्रीमेंट के तहत उसका बैनामा ले लिया गया। फिर, सौदे को लेकर पूर्व में ही हो चुकी बातचीत के आधार पर उसी दिन जमीन ट्रस्ट को 18 करोड़ में बेच दी गई। मंदिर समर्थक कहते हैं कि सरकार जमीन की सर्किल रेट का 4गुना देती है, इस मामले में सर्किल रेट 3गुना ट्रस्ट ने दिया है।

जमीन घोटाले के आरोप पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया के सवालों पर कहा कि हम पर महात्मा गांधी की हत्या के भी आरोप लगे हैं। हम आरोपों से नहीं डरते। जो आरोप लगे हैं, उसकी मैं स्टडी करूंगा। मीडिया से बातचीत में ही चंपत राय ने कहा कि 40 दिनों का अभियान फरवरी में ही खत्म हो गया था। मार्च 2021 तक ट्रस्ट को चंदे के रूप में 11 करोड़ लोगों से कुल 3200 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें चार करोड़ लोगों ने 10-10 रुपये का योगदान दिया है। इससे कुछ ही कम लोगों ने 100-100 रुपये का योगदान दिया है। 80 करोड़ रुपये सीधे बैंक एकाउंट में ऑनलाइन जमा हुए हैं। उधर, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र मीडिया के सवालों का बिना कोई जवाब दिए गाड़ी में बैठकर चले गए। अनिल मिश्र ने फोन भी नहीं रिसीव किया। ऋषिकेश उपाध्याय से किसी का संपर्क नहीं हो सका।