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बॉडी लैंग्वेज पॉजिटिव, फिर क्यों हैं मोदी-योगी में खटपट की अटकलें?

प्रमोद शुक्ल

जब मंच पर से कोई प्रधानमंत्री.. मुख्यमंत्री के लिए कहे कि #राजधर्म निभाएं… और फौरन ही मुख्यमंत्री पलट कर जवाब दे कि वही तो कर रहा हूं.. तो ऐसे सीएम और पीएम जब कमरे के अंदर मुलाकात करते हैं तब फोटो सेशन करवाने के लिए वो किस तरह से मीडिया के फोटो जर्नलिस्टों को पोज देते हैं… यह बात यदि समझनी हो तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

और यदि आप यह जानना चाहते हैं कि तमाम फैब्रिकेटेड खबरें जब कई दिनों से रिश्तों पर चोट करती हुईं मीडिया में अफवाह फैलाने की नीयत से टूलकिटिया पत्रकारों द्वारा प्लांट की जा रही हों, उस दौरान जब कोई सीएम और पीएम मुलाकात करते हैं, 80 मिनट तक कोई पीएम और सीएम जब पार्टी के भविष्य और सरकार की योजनाओं पर एकांत में खुले दिल से चर्चा करते हैं, तब उनकी चर्चा में कितनी गहराई होती है, कितनी गंभीरता होती है… और उस समय उनके चेहरों पर कैसे भाव होते हैं… यह बात अगर जानना समझना हो तो प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री की मॉस्क लगी नीचे की तस्वीर को देखा जा सकता है।

इसे आप तभी समझ सकते हैं जब वास्तव में आपको #बॉडी_लैंग्वेज की गहरी समझ हो।

योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के रूप में पीएम नरेंद्र मोदी से पहले भी जब मिले थे, तब की उनकी बॉडी लैंग्वेज क्या कह रही है उसे भी आप देख सकते हैं… और 11 जून 2021 की मुलाकात के दौरान जब वह मोदी जी से मिले तबभी उनकी बॉडी लैंग्वेज करीब-करीब वही बात कह रही है। कल वाली फोटो में दोनों महानुभाव मास्क लगाए हुए हैं। इसलिए आधा ही चेहरा दिख रहा है। बाकी बॉडी लैंग्वेज उनकी उनके पूरे बॉडी से आपको पढ़नी होगी। हालांकि, इन दोनों ही फोटो में विशेष अंतर जैसा कुछ भी नहीं मिलेगा। फिरभी, तमाम सारे टूलकिटिया तरह-तरह की बात कर रहे हैं। इसीलिए तीन तस्वीरों के जरिए बॉडी लैंग्वेज में फर्क समझाना जरूरी है। इन्हें देखकर फैसला कोई भी कर सकता है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पिछले दस दिनों से अटकलबाजियों, अफवाहों और सूत्रों पर आधारित खबरें प्रकाशित कर यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पीएम मोदी नाराज हैं और बदलना चाहते हैं। कैबिनेट में बदलाव करना चाहते हैं। ऐसी आशंका है कि योगी कैबिनेट के कुछ सहयोगियों ने मीडिया के जरिए इस हवा को और तूल दिया। फिलहाल, दिल्ली से किसी भी किस्म की सूचना न जारी होने और यूपी में कोई बदलाव न होने के बाद भी ऐसी खबरें प्लांट की जा रही हैं जिससे लगे की योगी-मोदी के बीच कुछ खटपट चल रही है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ज्योतिशास्त्र के विद्वान हैं।)

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Ranvijay Singh

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