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भारी वर्षा से निबटने के लिए IIT मुंबई जैसे संस्थानों के साथ करें साझेदारी- पीयूष गोयल

मानसून की पहली बारिश में ही मुंबई पानी-पानी हो गई। इसका असर रेलवे पर भी दिखा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को समीक्षा कर कहा कि देश में रेलवे और विशेषकर मुंबई को मानसून के लिए पूरी तरह तैयार रहने की जरूरत है। रेल और वाणिज्य एवं उद्योग और उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने बरसात के मौसम में सभी आकस्मिक समाधानों के लिए मुंबई उपनगरीय रेलवे की तैयारियों और रोड मैप की स्थितियों को समझा।

रेल मंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति की जांच की और ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए योजनाओं की समीक्षा की। श्री गोयल ने कहा कि रेलवे यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि मानसून शुरू होने पर मुंबईवासियों को कोई असुविधा न हो।

उपनगरीय प्रणाली पर मानसून की तैयारियों की समीक्षा करते हुए रेल मंत्री ने रेलवे से मानसून की भारी वर्षा से निपटने में रेलवे की तकनीकी और सिविल कार्यों में पहलों की दक्षता का अध्ययन करने के लिए आईआईटी मुंबई जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि रेलवे सेवाएं निर्बाध रूप से चलती रहें, नवाचार और कड़ी मेहनत का साथ-साथ होना चाहिए।

यह विदित है कि कोविड महामारी के दौरान भी रेलवे ने मुंबई में उपनगरीय खंड पर विशेष रूप से संशोधित ईएमयू रेकों सहित 6 मक स्पेशल ट्रेनों के ज़रिये 3,60,000 घन मीटर मक/कचरा/मिट्टी की सफाई के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। श्री गोयल ने म्यू निसिपल कॉर्पोरेशनों के साथ समन्विय कर रेलवे ट्रैक पर कचरे को फेके जाने को चेक करने के निर्देश दिये।

पिछले मानसून में बांद्रा, अंधेरी, माहिम, ग्रांट रोड, गोरेगांव, सैंडहर्स्ट् रोड, कुर्ला जैसे जल भराव वाले लोकेशनों की पहचान की गई और प्रत्येक लोकेशन के लिए अनुकूलित समाधान तैयार किया गया।

वास्तविक समय और वर्षा का प्रामाणिक डेटा प्राप्त करने के लिए पश्चिम रेलवे ने आईएमडी के सहयोग से चार और स्व तंत्र रूप से दस ऑटोमेटिक रेन गेज लगाये हैं। सीवरेज और सबमर्सिबल पंपों सहित ट्रैक और डिपो पर उपलब्ध कराए गए पंपों की संख्या में 33 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

बोरीवली-विरार खंड में नाले की सफाई के सर्वेक्षण और निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया गया और नालों की गहरी सफाई सुनिश्चित करने के लिए सक्शन/डी-स्लजिंग मशीनों का उपयोग किया गया।

कम से कम जलभराव सुनिश्चित करने के लिए नालों के निर्माण हेतु नई माइक्रो टनलिंग पद्धति को अपनाया गया है। बैठक में रेलवे बोर्ड और मुंबई के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।