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जम्मू-श्रीनगर के लिए ‘लाइफलाइन’ बनेगी बनिहाल-काजीगुंड सुरंग, जानें खासियत

जम्मू-कश्मीर में निर्माणाधीन बनिहाल-काजीगुंड सुरंग इसी महीने चालू हो सकती है। सुरंग में सामान्य ट्रैफिक के लिए खोलने के पहले आखिरी दौर का परीक्षण चल रहा है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ 2100 करोड़ रुपये की लागत से 8.5 किलोमीटर लंबी बनिहाल-काजीगुंड सुरंग का भी निर्माण पूरा हो चुका है। यह सुरंग सर्दियों के दौरान जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी के लिहाज से ‘लाइफलाइन’ के रूप में काम करेगी।

34.8 किमी. की दूरी हो जाएगी 16 किमी.

अभी तक बनिहाल से काजीगुंड तक जाने के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर 34.8 किमी का सफर एक घंटे 20 मिनट में पूरा करना पड़ता है। अब इस सुरंग के बनने से लगभग 35 किमी. की दूरी घटकर 16 किमी. रह जाएगी। इस सुरंग का निर्माण कार्य जून, 2011 में शुरू हुआ था। सुरंग के अंदर भूमि की अप्रत्याशित स्थितियों, स्थानीय जमींदारों और कंपनी के कर्मचारियों से संबंधित कई मुद्दों के कारण पिछले 10 वर्षों में सुरंग के काम में देरी हुई है।

कैसे कम होगी दूरी

फिलहाल, कश्मीर में सड़क के रास्ते पहुंचने के लिए जवाहर टनल और शैतान नाला को पार करना पड़ता है, जो सर्दियों के दौरान भारी हिमपात और फिसलन की स्थिति के लिए बाधित रहता है। बनिहाल से काजीगुंड तक बनाई गई यह टनल रास्ते में जवाहर सुरंग और शैतान नाला को बायपास करेगी।

8.5 किमी. लम्बी सुरंग में दो अलग-अलग टनल मार्ग

बनिहाल से दक्षिण कश्मीर में काजीगुंड तक बनाई गई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 8.5 किमी. लम्बी सुरंग में दो अलग-अलग टनल मार्ग हैं। दोनों सुरंगों को 500-500 मीटर पर एक गलियारे से जोड़ा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में एक सुरंग के वाहन को दूसरी सुरंग के रास्ते पर मोड़ा जा सके। बनिहाल दर्रे के नीचे से जा रही पुरानी सुरंग की चढ़ाई 2,194 मीटर है। इसलिए इस पर वाहनों की गति धीमी रहने के साथ ही राजगार्म पर जाम की स्थिति रहती है। बनिहाल-काजीगुंड सुरंग की औसत चढ़ाई 1,790 मीटर (5,870 फीट) है, जो जवाहर टनल से 400 मीटर कम है, जिससे इस 8.5 किमी. लम्बी सुरंग में हिमस्खलन की संभावना कम है।

सुरंग के दोनों छोर सीसीटीवी कैमरे से लैस

बनिहाल-काजीगुंड सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एनईसीएल) के मुताबिक इस सुरंग के दोनों छोर के बीच 126 जेट पंखे, 234 सीसीटीवी कैमरे और एक फायर फाइटिंग सिस्‍टम लगाया गया है। इस समय सुरंग में लगाए गए वेंटिलेशन, इलेक्ट्रिक सिस्टम सहित सभी आवश्यक उपकरणों का परीक्षण आखिरी दौर में है। कंपनी को सुरंग मार्ग पर ट्रायल के लिए वाहन चलाने की मंजूरी भी मिल गई है। चल रहे परीक्षण जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है और इस महीने के अंत तक सुरंग को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

(इनपुट-हिन्दुस्थान समाचार)