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असम के सीएम ने कहा – गरीबी कम करने के लिए अल्पसंख्यक अपनाएं “सभ्य परिवार नियोजन नीति”

असम के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अल्पसंख्यकों से परिवार नियोजन की एक ऐसी अपील कर डाली है जिसे लेकर हंगामा मचने के आसार हैं। सरमा ने अल्पसंख्यक समुदाय से गरीबी कम करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण के लिए “सभ्य परिवार नियोजन नीति” अपनाने का आग्रह किया है। सरमा ने अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को शिक्षित कर जागरूक करने और पुरुषों को आत्मनिरीक्षण करने की नसीहत दे डाली।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अपनी सरकार के पहले 30 दिन पूरा होने पर सीएम हिमंत बिश्वा सरमा ने राज्य में नई लकीर खींचने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि समुदाय के सभी हितधारकों को आगे आना चाहिए। समुदाय में गरीबी को कम करने में सरकार का समर्थन करना चाहिए, जो मुख्य रूप से जनसंख्या में निरंतर वृद्धि के कारण है।

उन्होंने कहा कि सरकार सभी गरीबों की संरक्षक है, लेकिन उसे जनसंख्या वृद्धि जैसी समस्या से निपटने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन की जरूरत है जो गरीबी, अशिक्षा और उचित परिवार नियोजन की कमी का मूल कारण है। सरमा ने कहा कि उनकी सरकार समुदाय की महिलाओं को शिक्षित करने की दिशा में काम करेगी, ताकि गरीबी की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

सरमा ने कहा कि सरकार मंदिर, सतरा और वन भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने दे सकती है। अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने भी सरकार को आश्वासन दिया है कि वे इन जमीनों का अतिक्रमण नहीं चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं से आत्मनिरीक्षण करने और लोगों को जनसंख्या नियंत्रण का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

इससे पहले कुछ दिनों पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिश्व सरमा ने प्रस्तावित गो-संरक्षण बिल का बचाव करते हुए कहा था कि हमें उन स्थानों पर गो-मांस नहीं खाना चाहिए जहां हिंदू रहते हैं। गाय हमारी माता है। हम चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल से मवेशी न आएं। हम चाहते हैं कि गो-मांस वहां न खाया जाए, जहां हिंदू रहते हैं। चूंकि हिंदू गायों की पूजा करते हैं, इसलिए उनकी शंकाओं का निवारण होना चाहिए।

ज्ञात कि हिमंत बिश्व सरमा ने 2 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद असम के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है। इससे पहले वह सर्वानंद सोनोवाल की नेतृत्व वाली सरकार में बतौर शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री थे। सरमा ने बतौर शिक्षा मंत्री असम में मदरसों को बंद करने का अहम फैसला किया था। यह भी गौर करने वाली बात है कि हिमंत सरमा 2015 में राज्य विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस छोड़कर भाजमा में आए हैं।