Home » इन शहरों में बच्चों पर वैक्सीन परीक्षण, तीसरी लहर का वैज्ञानिक आधार नहीं
देश न्यूज

इन शहरों में बच्चों पर वैक्सीन परीक्षण, तीसरी लहर का वैज्ञानिक आधार नहीं

देश में कोरोना की दूसरी लहर की धीमी रफ्तार के साथ ही तीसरी लहर की भी चर्चा जोरों पर है। साथ ही लोगों में बच्चों में संक्रमण फैलने का भी डर समाया हुआ है। इस बीच दिल्ली के एम्स में कोरोना से बचाव का स्वदेशी टीका कोवैक्सीन का बच्चों में परीक्षण का काम सोमवार से शुरू हो गया है। एम्स में वैक्सीन ट्रायल के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. संजय राय ने बताया कि सोमवार को करीब 20-30 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। स्क्रीनिंग का काम मंगलवार को भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए बच्चों की वैक्सीन को तैयार होने में कम से कम 6-9 महीने का वक्त लगेगा। इसके साथ ही डॉ संजय ने वैक्सीन के अलावा तीसरी लहर पर भी कई महत्वपूर्ण जानकारी दी।

ट्रायल से पहले बच्चों की स्क्रीनिंग

बच्चों में वैक्सीन के परीक्षण का काम शुरू हो गया है, ऐसे में परीक्षण में लगने वाले समय को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तक 20-30 बच्चों के स्क्रीनिंग का काम किया गया है। इतने ही मंगलवार तक और किए जाएंगे। ट्रायल शुरू करने से पहले बच्चों की अच्छी तरह स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसमें देखा जाएगा कि वो पूरी तरह से स्वस्थ है या नहीं। स्वस्थ पाए जाने के बाद ही बच्चों को टीका लगाया जाएगा। परीक्षण का काम 6-9 महीने में पूरा होगा।

पटना, भुवनेश्वर और दिल्ली में किया जा रहा बच्चों पर ट्रायल

वैक्सीन के ट्रायल में बच्चों के उम्र के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कोवैक्सीन का ट्रायल 2- 18 वर्ष की उम्र तक के बच्चों में किया जाएगा। इनमें भी तीन समूह बनाए जा रहे हैं, ताकि वैक्सीन के प्रभाव का अध्ययन किया जा सके। यह परीक्षण पटना के एम्स, भुवनेश्वर और दिल्ली में किया जा रहा है। कुल 525 बच्चों का चयन किया जाना है जिस पर टीके का परीक्षण किया जाएगा। सुरक्षा, अभिक्रियाशीलता और प्रतिरक्षण क्षमता के लिए बच्चों में कोवैक्सीन वैक्सीन का मूल्यांकन करना होगा।

तीसरी लहर में बच्चे होंगे प्रभावित,वैज्ञानिक आधार नहीं

इस दौरान उन्होंने तीसरी लहर में बच्चों पर प्रभाव पर कहा कि अभी तक इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पहली और दूसरी लहर में भी बच्चे संक्रमित हुए। अब तक हुए कई सीरो-सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है। यह बात भी सामने आई कि ज्यादातर बच्चे एसिम्टोमैटिक रहे यानि बिना किसी लक्षण के रहे। दूसरी बात टीके के परीक्षण की, तो परीक्षण में वक्त लगता है। जब वयस्कों के लिए टीका तैयार किया जा रहा था तब भी 6-9 महीने का वक्त लगा था।

वहीं तीसरी लहर आने पर उन्होंने बताया कि किसी भी महामारी की कई लहर आ सकती हैं, लेकिन इसका असर किसी एक निश्चित उम्र के लोगों पर होगा, ऐसा कोई तथ्य नहीं है। इसलिए लोगों को बेवजह डरना नहीं चाहिए। खासकर बच्चों के माता-पिता तीसरी लहर को लेकर काफी चिंतित हैं। ऐसे में उन्हें डरना नहीं चाहिए लेकिन जागरूक जरूर रहना चाहिए।

About the author

Ranvijay Singh

Add Comment

Click here to post a comment