Home » अपनी ‘सेहत’ छोड़ जीवनदाता’ बन दौड़ी रेलवे ने रख ली सरकार की लाज
न्यूज परिवहन स्वास्थ्य

अपनी ‘सेहत’ छोड़ जीवनदाता’ बन दौड़ी रेलवे ने रख ली सरकार की लाज

365 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश में ऑक्सीजन की डिलीवरी पूरी की, ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा करीब 1480 टैंकरों के साथ 15 राज्यों को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई

प्रयागराज: अप्रैल के दूसरे पखवारे से कोरीना संक्रमित मरीजों के लिए शुरू हुई ऑक्सीजन की कमी ने जिस वक्त पूरे देश में हाहाकार मचा दिया, तब रेल ही थी जिसने ‘हनुमान’ बनकर ‘संजीवनी’ बनी ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू की। देश के लिए रेलवे का यह साहसिक फैसला मरीजों के लिए नया जीवनदान लेकर आया। ऑक्सीजन पहुंचाने का काम वायु सेना के परिवहन विमानों ने भी किया, लेकिन उसकी सीमित पहुंच वह काम नहीं कर सकती थी, जो रेल से संभव था। 24 अप्रैल से 3 जून तक 359 ऑक्सीजन एक्सप्रेस से 15 राज्यों में 1463 टैंकर पहुंचाए। यह सब अपनी खस्ता मालीहालत को भूलकर किया गया जीवट प्रदर्शन था जिसने केंद्र सरकार की लाज उस वक्त रख ली जब न्यायालयों की तीखी टिप्पणियों ने उसे परेशान कर रखा था। वह दृश्य सोचकर भी किसी जानकार का मन सिहर सकता है जब जरूरत के वक्त रेलवे तेजी के साथ ऑक्सीजन शहर-शहर न पहुंचा पाता या कुछ दिनों की और देर हो जाती। हालांकि, अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर, बेड, डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ, टेक्नीशियन, टैंकर आदि की कमी के कारण मौतों का आंकड़ा रोक पाने में बहुत सफलता नहीं मिल सकी थी।

भारतीय रेल तमाम बाधाओं को पार कर तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है। अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 1463 से अधिक टैंकरों में 24840 मीट्रिक टन से अधिक तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है।

इन राज्यों में पहुंची ऑक्सीजन

महाराष्ट्र में 614 एमटी ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797 एमटी, मध्य प्रदेश में 656एमटी, दिल्ली में 5826एमटी, हरियाणा में 2135एमटी, राजस्थान में 98 एमटी, कर्नाटक में 2870एमटी, उत्तराखंड में 320एमटी, तमिलनाडु में 2711एमटी, आंध्र प्रदेश में 2528एमटी, पंजाब में 225एमटी, केरल में 513एमटी तेलंगाना में 2184एमटी, झारखंड में 38 एमटी और असम में 320एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई गई। जानकारी होने तक 6 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां 30 टैंकरों में 587एमटी से अधिक एलएमओ लेकर चल रही हैं।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस से देश के दक्षिणी राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी 10000 एमटी को पार कर गई।ऑक्सीजन एक्सप्रेस से दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक प्रत्येक में 2500 एमटी से अधिक एलएमओ पहुंचाई गई है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 41 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 एमटी तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी करने के साथ अपना काम प्रारंभ किया था।

रेलवे का दावा है कि यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम संभव समय में अधिक से अधिक संभव ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा 15 राज्यों- उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना , पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई है।

इन शहरों को मिला लाभ

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश भर के 15 राज्यों में लगभग 39 नगरों /शहरों में एलएमओ पहुंचाई है। इन शहरों में उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश में सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, पुणे, मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, तड़ीपत्री और विशाखापत्तनम, केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची शामिल हैं।

रेलवे ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार ऱखा है। भारतीय रेल को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

यहां से की डिलीवरी

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेल ने पश्चिम में हापा , बड़ौदा मुंदड़ा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा असम को ऑक्सीजन की डिलीवरी की है।

बनाए ग्रीन कॉरिडोर

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रही है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्रथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि तेज संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें। यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल ढ़ुलाई परिचालन में कमी नहीं आए।

आर्थिक चोट लगने की संभावना

ऑक्सीजन की ढुलाई का भाड़ा कब और कैसे मिलेगा, ये अभी बहुत साफ नहीं है। रेल अफसरों का दावा है कि एक ऑक्सीजन एक्सप्रेस एक गुड्स ट्रेन का पाथ इस्तेमाल कर गई। गुड्स ट्रेन 40-80 वैगन तक होती हैं। अधिकतर माल लोडिंग और ढुलाई नगदी आधारित है। जबकि, ऑक्सीजन एक्सप्रेस की ढुलाई का खर्च कब और कैसे आएगा, अभी कुछ साफ नहीं है। पिछले 14 महीने से रेलवे की यात्री ट्रेनें बंद हैं। ऐसे में रेलवे की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।