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PMJKY से 58 करोड़ लोगों को मिला मुफ्त अनाज, 13 हजार करोड़ खर्च

कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना देश के कमजोर तबके के लिए सहारा बनकर उभरी है। पूरी दुनिया में जब बीमारी फैल रही थी तो भारत ने अपने यहां इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया। भारत जानता था कि देशबंदी से रोज कमाकर खाने वालों पर बहुत बुरा प्रभाव होगा, लेकिन महामारी जिस तरह से विकराल रूप ले रही थी इसके सिवाय कुछ और रास्ता न था। दिहाड़ी मजदूर और अन्य प्रतिदिन कमाने वालों के लिए सरकार चिंतित थी। इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना लेकर आई। इस योजना के तहत कमजोर तबकों को मुफ्त में खाद्यान्न बांटना था। पिछले 2 महीने से इस योजना के तहत करोड़ों लोगों को मुफ्त में खाद्यान बांटा गया है।

क्या है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

इस योजना को सरकार द्वारा मार्च 2020 में आरंभ किया गया था। यह योजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज का एक हिस्सा है। इस योजना के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा राशन कार्ड धारकों को 5 किलो अनाज (गेहूं/चावल) एवं 1 किलो दाल दी जाती है। यदि, आपके राशन कार्ड में 4 लोगों का नाम दर्ज है तो आपको 20 किलो अनाज प्रदान किया जाएगा। यह अनाज हर महीने मिलने वाले अनाज से अलग होगा। तात्पर्य यह है कि यदि, आपको 1 महीने में राशन कार्ड पर 5 किलो अनाज मिलता है तो आपको 10 किलो अनाज प्रदान किया जाएगा।

इस योजना को पिछले साल मार्च 2020 से जून 2020 के लिए आरंभ किया गया था। कोरोना वायरस का प्रकोप देखते हुए इस योजना को पिछले साल छठ पूजा तक बढ़ा दिया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ मई 2021 तथा जून 2021 में प्रदान किया जा रहा है। इस योजना से सीधे तौर पर देश के 80 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचने का अनुमान है। ऐसी विकट परिस्थितियों में गरीब लोगों को इस योजना से काफी राहत मिली है।

मई-जून में 58 करोड़ लोगों को मिला मुफ्त खाद्यान

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव के अनुसार, “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना” के तहत भारतीय खाद्य निगम डिपो से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 63.67 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद्यान्न उठाया जा चुका है, जो कि मई और जून, 2021 के लिए कुल पीएम जीकेएवाई आवंटन का लगभग 80% है। 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मई 2021 में लगभग 55 करोड़ एनएफएसए (नेशनल फूड सिक्योरिटी ऐक्ट) लाभार्थियों को लगभग 28 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किए गए हैं। वहीं, जून 2021 में अब तक लगभग 2.6 करोड़ एनएफएसए लाभार्थियों को लगभग 1.3 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किए जा चुके हैं।

मई-जून के लिए 13 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं सब्सिडी पर

आगे बताते हुए सचिव ने कहा कि 3 जून 2021 तक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत, एनएफएसए लाभार्थियों को मई और जून 2021 के लिए क्रमशः लगभग 90% और 12% खाद्यान्न वितरित किए गए हैं, जिसमें मई और जून 2021 के लिए 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खाद्य सब्सिडी पर खर्च हो रहा है। आपको बता दें, पीएम जीकेएवाई के अंतर्गत मई और जून 2021 के लिए अब तक मिलने वाली खाद्य सब्सिडी 9,200 करोड़ रुपये से अधिक है।

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना की भूमिका

वर्तमान समय में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना (ओएनओआरसी) के अंतर्गत पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन का मासिक औसत लगभग 1.35 करोड़ दर्ज किया जा रहा है। इसके अलावा, अगस्त 2019 में ओएनओआरसी योजना की शुरुआत के बाद से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 27.8 करोड़ पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिनमें से लगभग 19.8 करोड़ पोर्टेबिलिटी ट्रांजैक्शन कोविड-19 अवधि के दौरान दर्ज किए गए हैं, यानी अप्रैल 2020 से लेकर मई 2021 तक।

क्या है वन नेशन वन राशन कार्ड योजना

इस योजना के अंतर्गत आप देश की किसी भी राशन की दुकान से राशन खरीद सकते हैं। सभी नागरिक जो काम करने के लिए किसी दूसरे राज्य जाते हैं वह अब इस योजना के माध्यम से देश की किसी भी राशन की दुकान से राशन खरीद सकेंगे। इस योजना का लाभ प्रवासी श्रमिक, मजदूर, दैनिक भत्ता लेने वाले, कूड़ा हटाने वाले, सड़क पर रहने वाले संगठित एवं असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले आदि जैसे नागरिकों को पहुंचेगा।

इस योजना के अंतर्गत राशन कार्ड आपके मोबाइल नंबर की तरह ही काम करेगा। जैसे कि आपको देश के किसी भी कोने में जाकर अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलना पड़ता है, वह हर जगह काम करता है। उसी प्रकार वन नेशन वन राशन कार्ड का उपयोग भी आप किसी भी राज्य में कर सकते हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग है प्राथमिकता

डीएफपीडी सचिव ने कहा कि कोविड परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत असुरक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (यानी सड़क पर रहने वाले, कचरा बीनने वाले, हॉकर्स, रिक्शा चालक, प्रवासी श्रमिक आदि) के सभी पात्र व्यक्तियों को इसके अंतर्गत शामिल करना, इस विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनएफएसए के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों/परिवारों की पहचान करने और निरंतर समीक्षा के माध्यम से उन्हें राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया संबंधित जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा 02 जून, 2021 को सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश जारी किया गया है कि, जिन पात्र लोगों के पास राशन कार्ड नहीं है,उन्हे राशन कार्ड जारी करने के लिए विशेष अभियान चलाएं।

बिना राशन कार्ड के भी मिलेगा राशन

बता दें कि PMJKY के तहत अनाज लेने के लिए आपको राशन कार्ड की जरूरत नहीं है, बल्कि केवल आधार कार्ड से ही जरूरतमंदों को राशन मिल जाता है। आधार कार्ड के जरिए, इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है। रजिस्ट्रेशन कराने पर उन्हें एक स्लिप दी जाती है, जिसे दिखा कर मुफ्त अनाज मिलता है।

योजना का बजट

पिछले साल, मार्च से जून तक के लिए यह योजना शुरू की गई थी। उसके बाद इसका विस्तार छठ पूजा तक कर दिया गया था। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के विस्तार पर 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंने का अनुमान था। वहीं इस वर्ष के लिए सरकार द्वारा योजना पर 26,000 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है।