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हिन्दू संत यतिनरसिंहानंद की हत्या का फिर हुआ प्रयास, काशी गुप्ता बनकर मंदिर में घुसा काशिफ

हिन्दू संत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या के लिए फिर साजिश रची गई। गाजियाबाद के डासना स्थित मंदिर में काशी गुप्ता के नाम से घुसे साजिशकर्ता को सेवादारों ने संदेह के आधार पर पकड़ लिया। पुलिस की पूछताछ में असलियत उजागर हुई तो लोग अचंभित रह गए। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। इसके पहले भी मई में यतिनरसिंहानंद की हत्या का प्रयास हो चुका है। उस वक्त कश्मीर से आए और हिन्दू पहचान के साथ रुके मुस्लिम युवक को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

बताते हैं कि डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करने की कोशिश की गई है। बुधवार को 2 सदिंग्ध युवक मंदिर परिसर में नाम और पहचान बदलकर घुस गए। गनीमत रही कि मंदिर के सेवादारों को इन दोनों पर शक हो गया और उन्होंने इनकी तलाशी ले ली। इस दौरान इनके पास से तीन सर्जिकल ब्लेड व कुछ आपत्तिजनक दवाएं बरामद हुईं। महंत के अनुयायियों ने बताया कि ये एक जानलेवा ड्रग ‘सायनायड’ है।

दोनों संदिग्धों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। दोनों ने मंदिर के भीतर घुसते समय खुद को हिंदू बताया था, लेकिन पुलिस ने उनमें से एक की शिनाख्त काशिफ़ के रूप में की है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। आरोपियों के पास से बरामद ‘सायनायड’ यदि किसी व्यक्ति को दे दिया जाए तो ये ड्रग शरीर को ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने से रोक देता है, जिससे दिल और दिमाग दोनों काम करना बंद कर देते हैं। इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने स्थानीय मीडिया को बताया कि मंदिर में पुलिस की तरफ से एक गार्ड की तैनाती रहती है। दोनों युवक रात करीब 9 बजे मंदिर परिसर में घुसे। इसके बाद दोनों ने मंदिर के प्रमुख द्वार के बाहर एंट्री रजिस्टर में अपना नाम डॉक्टर विपुल विजय वर्गीय नागपुर और काशी गुप्ता के रूप में दर्ज की। उस वक्त महंत यति नरसिंहानंद सरसरस्वती मंदिर में मौजूद नहीं थे। वे एक चैनल की डिबेट में हिस्सा लेने गए थे।

उनके अनुयायी अनिल यादव ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। दोनों पुलिस की हिरासत में हैं। जिस व्यक्ति ने अपना नाम विपुल विजय वर्गीय बताया है, उसने कहा कि वो डॉक्टर है और ब्लेड का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में करता है। वहीं, काशिफ़ ने पूछताछ में बताया कि विपुल से उसकी दोस्ती फेसबुक के माध्यम से हुई थी और फिर फोन पर बातचीत होने लगी। हालांकि, वो इस दोस्ती का मकसद नहीं बता पाया है।

काशिफ़ ने बताया कि विपुल कुछ दिनों से गाजियाबाद आया हुआ था और उसे डासना के मंदिर का दर्शन करना था, इसलिए वो उन्हें यहां लेकर आया था। काशिफ़ गाजियाबाद के ही संजयनगर का रहने वाला है। महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने आरोप लगाया है कि दोनों आरोपी किसी जिहादी संगठन से सम्बन्ध रखते हैं और उन्हें उनकी हत्या के लिए भेजा गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले 17 मई को जान मोहम्मद डार उर्फ जहांगीर को दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज के एक होटल से गिरफ्तार किया था। उसके पास से भगवा कपड़े व पूजा-पाठ की सामग्री बरामद हुई थी। जम्मू कश्मीर का ये आतंकी महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की सुपारी लेकर आया था। उसके पास से एक पिस्टल और 2 मैग्जीन के अलावा 17 कारतूस भी बरामद की गई थी।