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कोरोना काल: नेक काम और जिंदादिली की मिसाल बन लोगों का दर्द समझ रही ये तिकड़ी

यह बात सच है कि दुनिया का सबसे बड़ा मजहब ‘इंसानियत’ है। कोरोना जैसे गंभीर दौर में भी ऐसे कई वाकये सामने आए, जिन्होंने समाज के सामने इंसानियत की खूबसूरत मिसाल पेश की है। इन दिनों ऐसा ही कुछ मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घटित हुआ है। जी हां, ये वही भोपाल है, जहां जब भी बात होती है तो गंगा-जमुना तहजीब की, जिसमें हिंदू और मुसलमान विकास के हर पायदान में एक दूसरे के सहयोगी हैं।

पुराना भोपाल संकरी गलियां, नए पुराने घरों के बीच तमाम सारे भीड़ भाड़ वाले इलाके और मोहल्‍ला संस्‍कृति से पटा पड़ा यह इलाका ज्यादातर मुसलमानों का क्षेत्र है। वहीं आरीफ नगर जैसे इलाके भी हैं, जिसमें टाट के पैबंद वाले घर भी आपको दिख जाएंगे। दूसरी ओर नया भोपाल है, कलेक्ट्रेट को छोड़ दिया जाए तो सचिवालय से लेकर हर बड़ा सरकारी कार्यालय, विधानसभा से लेकर एमपी नगर जैसा योजनाबद्ध व्यावसायिक क्षेत्र, शिवाजी नगर एवं चार इमली जैसी व्यवस्थित सरकारी कॉलोनियां यहां बसती हैं।

इन दोनों क्षेत्रों को मिलाने वाले मुख्य चार रास्तों की तरह यहां भी सेवा, समर्पण, त्याग और परस्पर बंधुत्व का एक जुट रास्ता इस कोरोना काल में तमाम वैचारिक मतभेदों के बाद भी देखने को मिल रहा है, जिसने एक बार फिर गैस कांड (1984) के बाद 2020 और 21 के इन दो सालों में बता दिया है कि मत, पंथ, संप्रदाय, धर्म और जाति से मजबूत यदि कोई चीज होती है तो वह मानवता की छत है, जिसके नीचे हर इंसान सुकून महसूस करता है।

जिनका कोई नहीं उनकी मदद के लिए ये लोग आ रहे आगे

दरअसल, कोरोना काल में सेवा के ऐसे अनेक हाथ यहां एक साथ उठ खड़े हुए हैं, जिन्‍होंने बार-बार मानवता का झंडा बुलंद किया है। इस कोरोना काल में जब आपके जान पहचान के सभी लोग दूर-दूर हों और लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए हों और किसी के पास एक-दूसरे की परेशानियों के बारे में जानकारी लेने के लिए भी कोई मौजूद नहीं हो, तब ऐसे माहौल में भोपाल में सेवा के लिए आगे आए लोगों में गौरव बामनकुले, मुनव्वर खान और अर्पित पहाड़िया की तिकड़ी गरीबों की मदद के लिए सड़कों पर निकल पड़ी है।

बड़ी संख्या में भोजन बांटने का काम लिया हाथों में

मुनव्वर खान कहते हैं कि ऐसे कई असहाय, गरीब और जरूरतमंद हैं, जिनके ऊपर प्राय: सभी का ध्‍यान नहीं जा पाता है, ऐसे लोगों को खोजकर हम उनकी मदद करने का प्रयास करते हैं। खासकर गरीब, असहाय और फुटपाथ पर रहने वाले उन तमाम हजारों असहाय और भूखे लोगों को भोजन बांटने के लिए हम आगे आए हैं, जिनके पास एक दिन का भी भोजन उपलब्ध नहीं रहता और कोरोना के कारण से उनके लिए रोजमर्रा का भोजन जुटाना आसान नहीं रहा है।

मिल रहा है इन्‍हें बहुत लोगों का सहयोग

खान बताते हैं कि जिंदादिली और इस नेक काम में सहायता के लिए एक टीम काम कर रही है, जिसमें बहुत सारे लोग साथ आये हैं। इन सभी के सहयोग से यह संभव हो पाया है कि हम भोजन, राशन और पानी की बोतल पहुंचाने का काम आसानी से कर पा रहे हैं। मुनव्वर खान का कहना है कि ईश्वर ने हमें इस कार्य के लिए चुना, यह हमारे लिए गर्व की बात है, जो आज हम अपने इस नेक काम से लोगों की दुआ पा रहे हैं। मुझे यह कहते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि मैं और मेरे साथी किसी जरूरतमंद के काम आ रहे हैं, साथ ही इस मुसीबत की घड़ी में ऐसा कुछ कर पा रहा हूं, जिसके लिए अधिकांश लोग सक्षम होने के बाद भी आगे आने में संकोच कर जाते हैं।

इस साल में बांटे 18 हजार से अधिक भोजन पैकेट

टीम के अन्‍य सदस्‍य गौरव बामनकुले बताते हैं कि वह पिछले वर्ष लॉकडाउन में जरूरतमंद लोगों को इसी प्रकार भोजन के पैकेट, राशन और पानी की बोतल बांटते रहे थे। तब उन्होंने पांच हजार परिवारों तक अपनी मदद पहुंचाई थी, लेकिन इस वर्ष कोरोना की नई लहर पहले से ज्यादा भयानक थी, ऐसा कोई मोहल्ला नहीं बचा, जहां से शोक समाचार नहीं मिले। बच्चों के अनाथ होने के मामले इस लहर में इतने अधिक सामने आए हैं, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इस माहौल में स्वाभाविक है कि सरकार को भी सख्त कदम उठाने पड़े और कई दिनों तक धीरे-धीरे लॉकडाउन का समय बढ़ता रहा, इसलिए संकट की पहचान को समझते हुए हम लोगों ने अब तक लगभग 18 हजार भोजन के पैकेट जरूरतमंदों को इस शहर में पहुंचाए हैं। इसी तरह से आठ हजार पानी की बोतल भी श्मशान और कब्रिस्तान में रखवाने का नेक काम करने के साथ ही एक हजार सात सौ परिवारों को राशन किट पहुंचाई है। वे कहते हैं कि हम तीनों मिलकर हर रोज 400 भोजन के पैकेट बांटते हैं।