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चुनार-चोपन खंड पर भी 100 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें, पहले थी 30kmph

• शनिवार को चुनार-चोपन सेक्शन में चलाई गईं रिकॉर्ड 24 ट्रेनें। 102 किमी के इस खंड के उन्नयन के लिए किए जा रहे सभी प्रयत्न : महाप्रबंधक/उत्तर मध्य रेलवे

प्रयागराज : केंद्र सरकार के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे बड़े कार्यों के परिणय भी दिखने शुरू हो चुके हैं। उत्तर मध्य रेलवे के चुनार चोपन रेल खंड पर भी जल्द ही यात्री ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने लगेगी। इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे ने रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। वर्तमान में ट्रेनों की रफ्तार इस खंड पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा है। फरवरी 2021 के पहले ज्यादातर ट्रेनों की गति इस सेक्शन में मात्र 30 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इसके कारण न सिर्फ यात्री ट्रेनें पिटती थीं, बल्कि मालगाड़ियों की संख्या बढ़ाना भी संभव नहीं हो पा रहा था।

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी डॉक्टर शिवम शर्मा ने बताया कि तीव्र गति से प्राथमिकता के आधार पर किए गए बुनियादी ढांचे के कार्यों के परिणामस्वरूप इस खंड में माल गाड़ियों की सेक्शनल गति को बढ़ाकर 60 किमी प्रति घंटे (कुछ किलोमीटर को छोड़कर) कर दिया गया है। साथ ही इस गति को बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटे करने का प्रस्ताव भी प्रक्रियागत है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में हुए सुधार की बदौलत ही उत्तर मध्य रेलवे ने 102 किलोमीटर लंबे चुनार-चोपन सेक्शन में 24 मालगाड़ियों को चलाकर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। जबकि, वर्ष 2019-20 और 2020-21 में इस खंड में औसतन 09 ट्रेनें चलती थीं, वहीं वर्तमान वर्ष 2021 के प्रारंभ से, उत्तर मध्य रेलवे इस खंड में थ्रूपुट बढ़ाने के तरीकों और साधनों के संबंध में निरंतर प्रयासरत है।

इस मार्ग का महत्व इससे ही स्पष्ट होता है कि, यह सबसे तेजी से बढ़ते कोयला क्षेत्रों में स्थित कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड(एनसीएल) द्वारा उत्खनित कोयला पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी यूपी के बिजली घरों की मांग को पूरा करने का काम करता है।

देश में बिजली की बढ़ती मांग के दृष्टिगत बिजली घरों की बढ़ी हुई संभावित मांग को पूरा करने के लिए एनसीएल से कोयले का लदान बढ़ने की संभावना है। चुनार जंक्शन पर हावड़ा-दिल्ली मुख्य लाइन में मिलने से पहले एनसीएल से लोड किया गया कोयले के रेक चोपन-चुनार रेल खंड से गुजरते हैं। अब तक, इस खंड को केवल 30 किमी प्रति घंटे की एक सेक्शनल गति की अनुमति थी, जिससे अधिक ट्रेनों को चलाना संभव नही था। गति प्रतिबंध के अलावा, अधिक ट्रेन संचालन के लिए विद्युतीकरण और सिग्नलिंग से संबंधित कई मानकों को भी अपग्रेड करने की आवश्यकता थी।

फरवरी 2021 में रेलवे बोर्ड ने महाप्रबंधक/उत्तर मध्य रेलवे को एक पत्र के माध्यम से इस खंड में चलने वाली ट्रेन में सुधार के लिए तत्काल उपाय करने की बात कहा था, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की गति के सामांजस्य बनाए रखा जा सके। महाप्रबंधक/उत्तर मध्य रेलवे वीके त्रिपाठी ने इस संदर्भ में कई बैठकें कीं और इस महत्वपूर्ण खंड में ट्रेनों को बढ़ाने के लिए आवश्यक लंबे समय से लंबित कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।

2 अप्रैल 2021 को सोनभद्र में 132 केवी ट्रैक्शन सबस्टेशन (टीएसएस) चालू किया गया। यह कार्य इस खंड में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण वांछित कार्यों में से एक था। खंड का विद्युतीकरण दिसंबर 2019 में हुआ था, लेकिन इस टीएसएस के अभाव में विद्युतीकरण का पूरा लाभ लिया जाना संभव नही था।

उत्तर मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक बिप्लव कुमार बताते हैं कि, “बिजलीघरों में कोयले की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों की संख्या को औसतन 24 तक बढ़ाने की बात कही है। आज हमने यह आंकड़ा हासिल कर लिया है, पर हमारे सामने मुख्य चुनौती इसे बनाए रखने की है।” उन्होंने आगे कहा कि, ” वर्तमान उपलब्धि प्रयागराज मंडल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है”।

इस मार्ग का दोहरीकरण भी होगा

मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) / उत्तर मध्य रेलवे शरद मेहता ने जानकारी दी, “वर्तमान में, यह सिंगल लाइन सेक्शन है और दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे का कार्य चल रहा है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जा रही है।”