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प्रत्याशियों की पहली सूची आते ही रालोद में विरोध शुरू

प्रत्याशियों की पहली सूची आते ही रालोद में विरोध शुरू

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले दौर के लिए नामांकन की प्रक्रिया 14 जनवरी से शुरू हो गई है। कांग्रेस ने पहले दो चरणों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी गठबंधन ने पहले दौर के मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी। राष्ट्रीय लोक दल में प्रत्याशियों के नामों का ऐलान होते ही विरोध भी शुरू हो चुका है। पार्टी के रणनीतिकार विरोधी दलों को शांत करने और डैमेज कंट्रोल के प्रयास में जुटे हैं। कहा जा रहा है कि रालोद प्रत्याशियों में जाट प्रत्याशी की संख्या बेहद कम है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुए हिंदू-मुस्लिम दंगे का असर 2022 के चुनाव में भी दिखने की संभावना है। प्रत्याशियों के ऐलान के साथ ही इसकी चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में राष्ट्रीय लोक दल ने मुस्लिम प्रत्याशी घोषित किए हैं, वहां लड़ाई बेहद मुश्किल हो सकती है। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को लेकर भी जाट बहुल क्षेत्र में विरोध है।

कुल घोषित 29 प्रत्याशियों में आठ मुस्लिम उम्मीदवार हैं। इसमें रालोद ने हाजी यूनुस को बुलंदशहर, दिलन आज खान को स्याना, अहमद हमीद बागपत से प्रत्याशी बनाए गए हैं। समाजवादी पार्टी ने धौलाना से असलम चौधरी, कोल से सलमान सईद, अलीगढ़ से जफर आलम, कैराना से नाहिद हसन, किठौर से शाहिद मंजूर और मेरठ से रफीक अंसारी को प्रत्याशी बनाया है।

राष्ट्रीय लोक दल के ट्विटर हैंडल पर प्रत्याशियों की सूची अपलोड किए जाने के थोड़ी देर बाद ही विरोध में लोगों की आवाजें उठने शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में लोग प्रत्याशियों के नामों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसमें यह भी पूछा जा रहा है कि घोषित प्रत्याशियों की सूची में जाट कितने हैं?

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