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#Prayagraj जंक्शन के पुनर्विकास में DRM और GM का बंग्ला क्यों छोड़ा ?

#Prayagraj जंक्शन के पुनर्विकास में DRM और GM का बंग्ला क्यों छोड़ा ?

प्रयागराज: उत्तर मध्य रेलवे कानपुर के साथ प्रयागराज जंक्शन के पुनर्विकास योजना पर भी काम कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के रुचि लेने के कारण दोनों रेलवे स्टेशन के विकास का काम अब रेल भूमि विकास निगम से लेकर खुद जोनल रेलवे करेगा। इस योजना में व्यापक तोड़फोड़ भी शामिल है। प्रयागराज में सिविल लाइंस से सटी ट्रैफिक कालोनी में कर्मचारियों के आवास भी ध्वस्त किए जाने हैं। इसे लेकर कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे एम्पलाई संघ के महामंत्री आरपी सिंह ने इस मामले को लेकर महाप्रबंधक को कड़ा पत्र लिखा है।

क्या है योजना

रेलवे अफसरों के मुताबिक रेलवे पुनर्विकास योजना के तहत प्रयागराज जंक्शन को पहले रेल विकास निगम द्वारा निर्मित किया जाना था, लेकिन पीपीपी योजना में किसी निजी विकासकर्ता के रुचि न लेने के कारण अब इसे पूरी तरह बदल दिया गया है। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने पिछले दिनों निर्माण शाखा के मुख्य अभियंता और उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक से सीधी वार्ता कर नई डिजाइन को जल्द से जल्द स्वीकृत कर रेलवे बोर्ड में भेजने को कहा। नई डिजाइन के डीपीआर को पिछले दिनों स्वीकृत कर दिया गया है। इस योजना पर अब 432 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। इसके तहत प्रयागराज जंक्शन पर एयर स्पेस को अन्य विकसित रेलवे स्टेशनों से कम इस्तेमाल किया जाएगा। एक नंबर प्लेटफार्म पर कानकोर्स एरिया को छोड़कर ज्यादातर हिस्सा तोड़ा जाएगा। स्टेशन बिल्डिंग पर मौजूद वर्तमान कार्यालयों को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही सिविल लाइन साइड में ट्रैफिक लाइन कालोनी को पूरी तरह से हटाया जाएगा। इसमें करोड़ों खर्च कर बने नए आवास भी शामिल हैं। इसी हिस्से में बने मल्टीफंक्शनल कांप्लक्स को भी तोड़ने की योजना है, जिसे करीब सात आठ वर्षो पूर्व ही करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया है।

क्या है विरोध

नार्थ सेंट्रल रेलवे एम्पलाईज संघ के महामंत्री आरपी सिंह का कहना है कि प्रयागराज स्टेशन के डेवलपमेंट के नाम पर एक नया डीपीआर तैयार किया गया है, जिसमें डीआरएम और केंद्रीय विद्युतीकरण संगठन के महाप्रबंधक के बंगले को छोड़कर इस स्मिथ रोड और नवाब युसूफ रोड के बीच स्थित ट्रैफिक कॉलोनी के लगभग 300- 400 रेला आवासों को ध्वस्त किया जाना है। इसमें लगभग 10 वर्ष पहले बने 50 नए आवास भी शामिल हैं जिसके निर्माण में करोड़ों रुपए खर्च हुए। यही नहीं, ब्लॉक नंबर 67 के वे आवास भी शामिल किए गए हैं, जिसमें 1 वर्ष पहले ही करीब एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर व्यापक सुधार कराया गया है। कर्मचारियों की मांग है कि स्टेशन विकास में सबसे बड़ी बाधा डीआरएम और महाप्रबंधक आवास ही हैं, जिनके सामने की दशकों पुरानी मुख्य सड़क को बाधित कर दिया गया। इस सड़क के खुले होने पर पत्थर गिरिजाघर से रेलवे स्टेशन सीधे दिखता था। सिविल लाइंस साइड के मुख्य स्टेशन भवन के सामने यही दोनों आवास हजारों वर्ग मीटर जमीन घेरकर बने हैं। सिर्फ कर्मचारियों का आवास ध्वस्त करने का विरोध किया जाएगा।

महामंत्री का कहना है कि ट्रैफिक कॉलोनी सिविल लाइन से सटा हुआ हिस्सा है जिसकी जमीन अरबों रुपए कीमती है। केन्द्र सरकार के दबाव में जोनल रेल कुंभ मेला प्रबंधन के नाम पर इस भूमि से कर्मचारियों के आवासों को हटाकर पूरी तरह खाली कर देगा। बाद में यही भूल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निजी कंपनियों को आवंटित कर दी जाएगी।

यह है सुझाव

एनसीआरईएस महामंत्री का कहना है कि उत्तर मध्य रेलवे नया जोन बनने के बाद महाप्रबंधक कार्यालय बनाने के लिए प्रयागराज जंक्शन के सिविल लाइन साइड की तरफ वर्तमान प्लेटफार्म नंबर 6 के सामने की पुरानी लोको शेड और अन्य कार्यालय की परित्यक्त भवनों के साथ-साथ पुरानी जर्जर हालत में स्थित आवासों की बलईपुर कॉलोनी चिन्हित की गई थी। परंतु सूबेदारगंज में रेल भूमि को अनधिकृत कब्जे से बचाने के लिए वर्तमान नार्थ सेंट्रल रेलवे का महाप्रबंधक कार्यालय बनाया गया। महाप्रबंधक कार्यालय के लिए पूर्व में चिन्हित भवन आज भी परित्यक्त हैं और उन्हें ध्वस्त कर प्रयागराज जंक्शन के सिविल लाइन साइड के सर्कुलेटिंग एरिया का विकास और विस्तार किया जा सकता है। प्रयागराज में रेल आवासों की सबसे अच्छी ट्रैफिक कॉलोनी के आवासों को छोड़े जाने से रेल कर्मचारियों में बहुत असंतोष है।

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