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कोरोनावायरस: गुनाहगार चीन को भुला भारतीय, दक्षिण अफ्रीकी और ब्रिटेन वैरिएंट पर जोर

कोरोना महामारी का शहर वुहान है, यह तथ्य बच्चे-बच्चे की जुबान पर है लेकिन इन दिनों दुनियाभर ही नहीं, भारत में भी एक बड़ा तबका है जो वुहान की जगह भारतीय म्यूटेंट, दक्षिण अफ्रीकी म्यूटेंट, ब्रिटेन म्यूटेंट और डबल म्यूटेंट की चर्चा में मशगूल है। यही नहीं, चीन के खिलाफ कोरोना मामले की जांच पूरी करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुके विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारतीय म्यूटेंट यानि डबल म्यूटेंट यानि बी.1.617 को वैश्विक चिंता का कारण करार दिया है। जबकि, दुनियाभर में अब तक 13 लाख वेरिएंट की पहचान हो चुकी है, जो अलग-अलग देशों में पाए गए हैं।

नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के अनुसार 4 मई तक भारत के 27 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में ब्रिटिश और डबल म्यूटेंट वेरिएंट के पहुंचने की पुष्टि हो चुकी है। पिछले साल जनवरी से सितंबर तक पूरी दुनिया में हर महीने 2 नए वेरिएंट रिपोर्ट किए गए थे। यह भी कहा जा रहा है कि भारत में पंजाब और गुजरात में संक्रमण के लिए मुख्य तौर पर ब्रिटिश वेरिएंट जिम्मेदार है जबकि महाराष्ट्र में डबल म्यूटेंट वेरिएंट जिम्मेदार है। दिल्ली में यह दोनों वेरिएंट देखे गए हैं। लगातार नए म्यूटेशन के कारण कोरोना वायरस ज्यादा खतरनाक रुख अख्तियार करता जा रहा है। कोरोना की पहली लहर में काफी हद तक सुरक्षित निकलने वाले भारत में दो नए वेरिएंट ने तबाही मचा रखी है। भारत में पहली बार देखे गए डबल म्यूटेंट वैरीएंट को ताजा संक्रमण के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

हालांकि, एनसीडीसी के निदेशक सुजीत सिंह का कहना है कि भले ही दुनिया दूसरी लहर के लिए भारतीय वेरिएंट को जिम्मेदार मानती हो, लेकिन अभी हमारे पास ऐसा डेटा नहीं है जिससे हम ऐसा कह सकें। इसके विपरीत डब्ल्यूएचओ की मुख्य विज्ञानी सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि विश्व स्वास्थ संगठन जल्द ही डबल म्यूटेंट वैरीअंट को ‘वैरीअंट आफ कंसर्न’ घोषित कर सकता है। विश्व स्वास्थ संगठन की मारिया वन कारखोवे ने कहा हम इस वायरस को वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण के रूप में वैद्य वर्गीकृत कर रहे हैं। ऐसी जानकारियां हैं जिससे इसकी संक्रामकता बढ़ने का पता लग रहा है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि भारतीय वैरियंट पिछले साल दिसंबर में देखा गया था। वाॅन ने कहा कि मंगलवार तक इस वेरिएंट और इसी क्रम के तीन अन्य वैरीअंट से जुड़ी कुछ और जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। इस वायरस के संक्रमण क्षमता बहुत ज्यादा है।

भारत के प्रति दुराग्रह को इससे भी समझा जा सकता है कि वैज्ञानिक शोध वाली पत्रिका लैसेंट ने पिछले साल कोरोना को भारतीय मूल का होने का कर डाला था। विरोध हुआ तो पत्रिका इससे मुकर गई और छानबीन के बिना प्रकाशन की बात करते हुए लेख को हटा दिया। फिर, दावा किया कि भारत में अगस्त 2020 तक दो करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। ये दावा भी झूठा निकला। अब शोध प्रकाशन वाली पत्रिका ने राजनीतिक लेख के जरिए दावा किया है कि भारत में पांच लाख लोगों की मौत अगले महीने तक हो सकती है। जबकि, कई राज्यों में महामारी के पांव सिकुड़ने लगे हैं।

रोचक यह है कि दो दिन पहले ही यह खबरें सामने आईं हैं कि चीन कोरोना वायरस को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर युद्ध की तैयारी में पिछले 3 वर्षों से जुड़ा हुआ था। आस्ट्रेलियाई अखबार और ब्रिटेन के अखबार में इस बात का दावा चीन के सैन्य अधिकारियों और स्वास्थ्य अधिकारी की तरफ से लिखे गए दस्तावेजों के आधार पर किया है। इसमें आशंका जताई गई है कि चीन ने कोरोनावायरस को जैविक हथियार के रूप में मानव पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई। ऐसे में वायरस के जड़ देश पर प्रहार करने के बजाए भारतीय वेरिएंट या ब्रिटेन वेरिएंट की चर्चा को धार देकर चीन को दोषी न ठहराने की कोशिशों पर विराम लगना चाहिए।