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5जी को कोरोना वायरस से जोड़कर डराने से किसे है लाभ ?

कोरोना महामारी से पूरा देश त्राहि-त्राहि कर रहा है। बिना ब्रेक की गाड़ी बन चुकी महामारी कितनों को निगल जाएगी, कोई नहीं जानता। अस्पतालों में अव्यवस्था, ऑक्सीजन, रेमिडिसिविर इंजेक्शन समेत सर्दी-जुखाम-बुखार की दवाओं की किल्लत, जमाखोरी और जरूरी खाद्यान्नों की महंगाई के कारण लोगों में सरकारों के खिलाफ भारी गुस्सा भी पनपा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर 5जी टेस्टिंग को महामारी के फैलाव का कारण बताने वाले तमाम संदेश भी वायरल हो रहे हैं। एक ऑडियो संदेश इस कदर खौफ बना रहा है कि लोग यह तक कहने लगे हैं कि 5जी टेस्टिंग को रोक देना चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार और सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोशिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने इस संदेश को अफवाह करार दिया है। यह सफाई भी आ गई कि कोरोना संक्रमण से 5जी तकनीक का कोई लेना देना नहीं है। परंतु, अफवाह है कि गांव-गिरांव तक लोगों को भ्रमित कर रही है। ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि आखिर इससे फायदा किसे हो सकता है?

केंद्र सरकार ने बीते मंगलवार को ही भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, जियो इन्फोकॉम और सरकारी कंपनी एमटीएनएल को टेस्टिंग शुरू करने की अनुमति दी है। जियो इन्फोकॉम खुद की तकनीक से टेस्टिंग करेगी। अन्य कंपनियां सैमसंग, नोकिया, सी-डॉट और एरिक्शन के उपकरणों की मदद लेंगी। यहां यह गौर करने वाली बात है कि केंद्र सरकार ने भविष्य में कारोार की रीढ़ बनने वाली 5जी नेटवर्क की टेस्टिंग के लिए आवेदन करने वाली चीन की कंपनियों हुवावेई और जेडटीई को अनुमति नहीं दी। इससे संभावित नुकसान का आकलन कर चीन तमाम तरीकों से भारत की घेराबंदी में लगा है। दुष्प्रचार भी इसका एक हिस्सा है। जानकारों का दावा है कि भारतियों के दबाव में यदि टेस्टिंग की प्रक्रिया को रोक दे तो दुनिया के कई देशों में पहुंच चुकी इस तकनीक के इस्तेमाल में भारत मीलों पीछे खिसक जाएगा। आर्थिक नुकसान समेत सैन्य, स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन, डिजिटल क्षेत्र भी पिछड़ जाएगा। रक्षा विभाग के एक अफसर का मानना है कि टेलीकम्युनिकेशन क्षेत्र में 5जी तकनीक का इस्तेमाल असीमित दिखता जरूर है लेकिन वास्तविक रूप से इसका दायरा बेहद कम है। भविष्य के युद्ध तकनीक आधारित होंगे। स्वास्थ्य, परिवहन, मौसम विज्ञान और कृषि क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन होने वाले हैं।

ऐसे में यह जरूर देखना चाहिए कि इस दुष्प्रचार का नफा और नुकसान किसे होने वाला है? वायरल ऑडियो में कहा जा रहा है कि राज्यों में 5जी नेटवर्क की टेस्टिंग की जा रही है, जिस कारण लोगों की मृत्यु हो रही है। लोग भ्रमित रहें, इसलिए इसे कोविड-19 नाम दिया जा रहा है। 15 मई के बाद यह दुष्प्रभाव कम हो जाएगा। यहां टाइमिंग पर ध्यान देने लायक है। विभिन्न वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने भी कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर का पीक मई के मध्य तक हो सकता है। ऑडियो वायरल करने वाले ने इस चेतावनी का भी ध्यान रखा है जिससे उसकी बात सच लगे। सूचना मंत्रालय के पीआईबी फैक्ट चेक ने इस संदेश को फर्जी करार दिया है। सीओएआई के महानिदेशक एसपी कोचर ने एक बयान में कहा है कि इस तरह की खबरें पूरी तरह झूठ हैं। दूरसंचार विभाग को भी इसे लेकर पत्र लिखा है। कोचर ने कहा कि देश में अभी कहीं भी 5जी का परीक्षण ही नहीं हो रहा है। साथ ही अब तक इसका एक भी टॉवर नहीं लगा है। ऐसे में दुष्प्रभाव की बात भी निराधार है।

आभासी दुनिया के जानकारों का कहना है कि ट्वीटर और फेसबुक पर देश के बाहर बैठे लोग ऐसी सामग्रियों को अपलोड करते हैं जो भारत को नुकसान पहुंचाए। नामसझी और अज्ञानता के कारण सरकार के विरोधी ऐसी बातों को लपक लेते हैं। बगैर सच्चाई परखे लोग ऐसे संदेशों को वायरल करने में जुट जाते हैं। भारत में यदि टेस्टिंग को रोक दिया जाए तो इसका फायदा परोक्ष/अपरोक्ष चीन उठा सकता है।

5जी में भारत की पहल

नरेंद्र मोदी सरकार ने दुनिया के साथ कदमताल करने के लिए 5जी प्रोद्योगिकयों को आगे बढ़ने का फैसला 2018 में कर लिया था। इसके लिए सरकार ने बिल्डिंग टू एंड टू 5जी टेस्ट बिड कार्यक्रम शुरू किया। यह 3 वर्षीय कार्यक्रम मार्च 2018 में 2250 मिलियन बजट के साथ प्रारंभ किया गया। इसमें आईआईटी चेन्नई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर, आईआईटी हैदराबाद और भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर को जोड़ा। विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 5जी तकनीक पर कई शैक्षणिक, शोध एवं विकास परियोजनाओं का वित्त पोषण किया। जुलाई 2018 में एरिक्सन ने आईआईटी दिल्ली में ब्रॉडबैंड और कम विलंबता क्षेत्र में प्रौद्योगिकियों के डिजाइन के लिए पहला सार्वजनिक 5 जी परीक्षण पीठ खोला। सरकार ने भी इसे समर्थन दिया। रोचक यह है कि 3जी, 4जी के बजाय 5जी नेटवर्क में निजी कंपनियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की एमटीएनएल और बीएसएनएल को भी तवज्जो मिल रही है। यूपीए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को पीछे छोड़ दिया था।