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ऑक्सीजन तो है सिलेंडर, टैंकर और मेडिकल स्टाफ की कमी से परेशान हैं सरकारें

कोरोना महामारी में ऑक्सीजन की कमी को लेकर पूरे देश में हल्ला और हंगामा मचा हुआ है। हाईकोर्ट्स, सुप्रीम कोर्ट तक सरकारों के खिलाफ तल्ख टिप्पणियां कर रहे हैं। सच है कि संकट है लेकिन असली समस्या ऑक्सीजन से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर, टैंकर और मेडिकल स्टाफ की कमी की भी है। सरकारी ही नहीं, निजी अस्पताल भी इन्हीं समस्याओं से दो चार हैं। यह ऐसी समस्या है जिसका रातोंरात समाधान मुश्किल दिख रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने मेडिकल स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए प्रयास किए हैं, जिसके परिणाम अगले कुछ महीनों में दिख सकते हैं।

ज्यादातर अस्पताल और राज्य सरकारें चिकित्सकों और नर्स, वार्ड ब्वाय, सफाई कर्मियों समेत अन्य मेडिकल कर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मेडिकल कर्मियों को 25% तक प्रोत्साहन राशि देकर आकर्षित करने की कोशिश की है। साथ ही नए स्टाफ की भर्तियों का जतन भी शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया है कि एक 2155 डॉक्टर, 3090 स्टाफ नर्स, 1540 वार्ड बॉय और 1540 सफाई कर्मियों की तत्काल आवश्यकता है। वर्तमान में कम मानव संसाधन ही उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कार्यरत सभी कर्मचारी भी विभिन्न कारणों से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की भी है जो खुद कोरोना पॉजिटिव है।

एएमए चिकितसकों का अचानक बीमारों की संख्या बढ़ने के कारण मेडिकल स्टाफ का प्रबंध करना मुश्किल हो रहा है पूर्व की जरूरतों के अनुसार ज्यादातर अस्पतालों में मेडिकल इंफ्रा विकसित हैं। वर्तमान में वह सभी संसाधन बौने साबित हो रहे हैं। बेड की कमी के पीछे भी यही वजह है।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने भी मेडिकल स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाया है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का कहना है कि जिस प्रकार कोविड मामले लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में हमें और ज्यादा चिकित्सकों, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की आवश्यकता है। कहा कि जिलाधिकारी, सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट को जितनी संख्या में स्टाफ की आवश्यकता महसूस हो, बहाली कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का दावा है कि प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ तत्काल मिलेंगे, इसमें संदेह है।

ऑक्सीजन सिलेंडरों और टैंकर्स की भी भारी कमी है। अफसरों का कहना है कि ज्यादातर राज्यों के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन का आवंटन कर दिया है, परंतु इनकी ढुलाई के लिए जरूरी टैंकर की कमी समस्या खड़ी कर रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हाईकोर्ट के सामने इस बात की गुहार लगाई कि टैंकर न होने के कारण केंद्र सरकार से आवंटित ऑक्सीजन दिल्ली को नहीं मिल पा रही है। दिल्ली के लिए ज्यादा टैंकर का इंतजाम किया जाए। इस समस्या से उत्तर प्रदेश भी जूझ रहा है। राहत की बात इतनी जरूर है कि विदेशों से अब तक करीब 150 क्रायोजेनिक टैंकर्स आ चुके हैं। इनके पहुंचने से रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस धड़ाधड़ ऑक्सीजन पहुंचा रही है, लेकिन राज्यों के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर की संख्या कम होने से उस रफ्तार से लोगों को मदद नहीं मिल पा रही है, जैसी मिलनी चाहिए। एक बड़ा कारण यह भी है कि तमाम लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर घरों में जमा कर लिया है। इसके कारण सिलेंडर का सर्कुलेशन कम हो गया है। विदेशों से पहुंचने वाले ऑक्सीजन जनरेटर और डीआरडीओ के ऑक्सीजन जनरेटर ही उम्मीद की किरण बने हैं।

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  • Sarkar से कह दो कि मेडिकल की पढ़ाई और महंगी कर दी ताकि गरीब बच्चे पढ़ सके डॉक्टर मेडिकल वाले और आदमी भक्ति हो सके