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5जी के लिए सरकार और मोबाइल कंपनियां तैयार, दिसंबर 2021 से नेटवर्क मिलने की आस

देश में 5जी मोबाइल नेटवर्क मिलने की संभावना अब प्रबल होती दिख रही है। केंद्र सरकार ने मोबाइल कंपनियों को 5जी ट्रायल शुरू करने की इजाजत दे दी है। मंगलवार को हुए इस फैसले के अनुसार अगले छह महीने तक ट्रायल चलेगा। इसमें निजी टेलीकॉम कंपनियों भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन आइडिया के अलावा सरकारी कंपनी महानगर टेलीफोन लिमिटेड (एमटीएनएल) को 5जी ट्रायल की अनुमति मिली है।

कंपनियों को कहा गया है कि वह छोटे शहरों और गांवों में भी नेटवर्क ट्रायल करें जिससे यह सुविधा केवल बड़े शहरों तक ही सीमित ना रह जाए। खास बात यह है कि सरकार ने चीन की कंपनियों को इस पूरे ऑपरेशन से दूर रखा है। चीनी कंपनी हुआवेई और जेडटीई भारत में 5जी नेटवर्क खड़ा कर मोटी कमाई करने की फिराक में थीं लेकिन सुरक्षा कारणों को वजह बताते हुए सरकार ने दोनों कंपनियों को अनुमति न देकर लद्दाख में रार बढ़ाने और कोरोना महामारी से भारतीय अर्थतंत्र को चौपट कर दाने वाले चीन को भी सबक दे दिया है।

इन कंपनियों ने टेलीकॉम उपकरणों के मूल निर्माताओं के साथ करार किया है जिन्हें एरिक्शन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट 5G टेक्नोलॉजी मुहैया कराएगी। भारतीय कंपनी रिलायंस जियो अपनी खुद की विकसित टेक्नोलॉजी की मदद से ट्रायल में हिस्सा लेगी। यह भी गौर करने वाली बात है कि टेलीकॉम कंपनियों को 5G टेक्नोलॉजी के साथ 5जीआई टेक्नोलॉजी पर भी ट्रायल करना होगा। 5जीआई टेक्नोलॉजी आईआईटी मद्रास और आईआईटी हैदराबाद ने संयुक्त रूप से विकसित किया है जिसे इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन की तरफ से भी मान्यता दी जा चुकी है। बता दें कि एयरटेल ने इस साल जनवरी में ही 5G सेवा की शुरुआत के लिए खुद को तैयार बताया था। रिलायंस जियो ने भी अपने 5G नेटवर्क विकसित करने की जानकारी दे दी है।

बताया जा रहा है कि 5जी सेवा के बवाल होने पर यूजर्स को 4G के मुकाबले 10 गुना अधिक स्पीड से डाउनलोडिंग सुविधा मिलेगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तकनीक के आने पर टेली मेडिसिन, टेली एजुकेशन, ड्रोन की मदद से कृषि निगरानी और रक्षा क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन आने की संभावना है। भविष्य में आकाश में नए रक्षा उपकरण पहुंचेंगे जो 5जी से नियंत्रित होंगे। साथ ही परिवहन प्रणाली भी स्वचालित तरीके से नियंत्रित की जा सकेगी। चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल का इस्तेमाल नई तकनीक पर निर्भर होगा। आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल व्यापक होगा।

ट्रायल से देश में विकसित किए गए 5G फोन व अन्य उपकरणों की परख भी होगी। कहा गया है कि 5G ट्रायल के लिए दूरसंचार विभाग इन कंपनियों को अलग से स्पेक्ट्रम का आवंटन करेगा लेकिन यह कंपनियां अपने पहले से आवंटित स्पेक्ट्रम पर भी 5G का ट्रायल कर सकेंगे। ट्रायल के लिए दिए गए 6 महीने के पहले के 2 महीनों में उपकरणों की खरीदारी और उनकी सेटिंग का काम किया जाएगा। दूरसंचार विभाग के मुताबिक ट्रायल पूरी तरह से चालु नेटवर्क से अलग होगा और इसके कारोबारी इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी।



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