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दांदूपुर पहुंची नाम परिवर्तन एक्सप्रेस, अब कहलाएगा मां बाराही देवी धाम रेलवे स्टेशन

सौरव सोमवंशी

प्रतापगढ़: भारतीय रेलवे की परिवर्तन एक्सप्रेस उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में पढ़ने वाले दांदूपुर स्टेशन तक पहुंच चुकी है। प्रतापगढ़ जनपद में स्थित दांदूपुर रेलवे स्टेशन अब मां बाराही देवी धाम रेलवे स्टेशन के रूप में जाना जाएगा। कहा जाता है कि मां बाराही देवी की स्थापना 12वीं सदी में बुंदेलखंड के वीर लड़ाका आल्हा और उदल ने की थी। दोनों भाइयों ने युद्धों में सफलता के लिए मां बाराही देवी की आराधना की थी।

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने कहा है कि दादूपुर रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तित कर मां बाराही देवी रेलवे स्टेशन कर दिया गया है। यह परिवर्तन तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गया है।

प्रतापगढ़ के सांसद संगम लाल गुप्ता दांदूपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था। मां बाराही देवी में आस्था आसपास के बड़े के लोगों की है। शिलालेख के मुताबिक मंदिर बारहवीं सदी के आसपास का है। मां बाराही सदियों से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर रही हैं।

तहसील मुख्यालय रानीगंज से लगभग पांच किमी उत्तर की ओर सई नदी के किनारे एक ऊंचे टीले पर मां बाराही देवी का धाम स्थित है। इन्हें चौहरजन देवी के नाम से भी पुकारा जाता है। आस्था और विश्वास की प्रतीक चौहरजन देवी धाम की स्थापना की निश्चित तिथि किसी को ज्ञात नही हैं।

किंवदंतियों के मुताबिक इस मंदिर की स्थापना बारहवीं सदी में आल्हा और ऊदल नामक दो वीर भाइयों ने की थी। सफलता के लिए दोनों भाइयों ने देवी की कठिन आराधना की थी। परिणामस्वरूप दोनों भाइयों ने असफलता का कभी मुंह नहीं देखा। कहा जाता है कि इसी मंदिर के बगल आल्हा की ओर से बनवाया गया एक प्राचीन कुंआ भी स्थित है। वह किसी सुरंग से जुड़ा बताया जाता है।

एक अन्य किंवदंती के अनुसार मुगल शासन में देवी प्रतिमा को खंडित कर नदी में फेंक दिया गया था। बाद में राजा चौहरजा को देवी ने स्वप्न में अपनी उपस्थिति बताई थी। इसके बाद राजा ने गहरे पानी से माता की प्रतिमा निकलवाकर पुन: प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। तभी से मां बाराही का नाम चौहरजन देवी भी पड़ गया।

मान्यताओं के अनुसार मां बाराही का दर्शन पूजन करने वाले को आयु और यश की प्राप्ति होती है। बुजुर्गों के मुताबिक माता के दरबार में माथा टेेककर मांगी गई मन्नत निश्चित ही पूरी होती है। प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को यहां मेले का आयोजन होता है।

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