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2014 से 44 में 34 विस चुनाव हारी कांग्रेस, मनीष तिवारी हिन्दुत्व पर राहुल गांधी के रुख से खफा

दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद की पुस्तक के बाद हिंदू और हिंदुत्व को लेकर राहुल गांधी के विचारों से पंजाब के सांसद मनीष तिवारी सहमत नहीं है। वह लगातार राहुल गांधी के नए विचारों से असहमति जता रहे हैं। राहुल और प्रियंका गांधी की नई राजनीतिक स्टाइल से खफा मनीष ने कहा कि 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव हम हार चुके हैं। 2014 से लेकर अब तक 44 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 34 में हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी नेतृत्व अब भी कायाकल्प की हमारी पीड़ा पर ध्यान दें तो कांग्रेस 2024 में 272 सीटें जीत सकती है।

मनीष तिवारी ने एक हिंदी दैनिक से बातचीत में कहा कि जी-23 कोई 23 नेताओं का समूह नहीं है। बल्कि लाखों आम कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावना है, जो चाहते हैं कि पार्टी पुराने गौरव की ओर लौटे। अफसोस है कि पूरे प्रयास को गलत समझा गया। यदि कांग्रेस लोकसभा में 4050 सीटों पर ही सिमट गई है तो खुद में झांकना चाहिए।

सलमान खुर्शीद की पुस्तक के बाद हिंदू और हिंदुत्व को लेकर राहुल गांधी के दिए बयानों पर मनीष तिवारी ने कहा कि मैंने अभी यह किताब पढ़ी नहीं है। हालांकि, इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं के बारे में मेरी सीमित समझ में आईएस और बोको हराम सबसे खतरनाक है। विश्व के शांतिप्रिय मुसलमानों ने उन्हें खारिज कर दिया है। जहां तक हिंदुत्व का संबंध है चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जगदीश सरण वर्मा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने 1995 में कहा था कि हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सम्मान करना चाहिए।

राहुल और प्रियंका गांधी के पिछले कुछ चुनाव के दौरान से मंदिरों मंदिरों जाने की बात पर मनीष ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले धर्म को लेकर कांग्रेस में दो दृष्टिकोण थे। गांधीवादी मानवतावाद और नेहरूवादी बहुलताबाद। गांधी के बाद नेहरू के धर्मनिरपेक्षता वाली दृष्टिकोण को मजबूती मिली। मैं एक हिंदू हूं। यह मूल वैचारिक धारणा है। कांग्रेस को भी समझना चाहिए। मंदिर, गिरजाघर, गुरुद्वारा, मस्जिद में माथा टेकने में कोई बुराई नहीं है। यह राजनीति का आधार नहीं होना चाहिए। इसे ही राजनीति का आधार बनाना है तो मुझे हिंदू महासभा या जमात-ए-इस्लामी में होना चाहिए।

मनीष ने कहा मैं पंजाब से एकमात्र हिंदू सांसद हूं और उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं जहां पर खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। मुझे इसलिए नहीं चुना गया क्योंकि मैं हिंदू या सिख हूं। बल्कि इसलिए कि मैं पंजाबियत में रंगा हुआ हूं। गौरतलब है कि मनीष तिवारी श्रीआनंदपुर साहिब से सांसद हैं।

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