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कृषि कानून के बाद क्या CAA और NRC की भी वापसी होगी ? नई जंग शुरू

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया तो इसके थोड़ी ही देर बाद सीएए और एनआरसी जैसे कानूनों को भी वापस लेने की मांग ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग सीएए और एनआरसी को वापस लेने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की चर्चा करने लगे हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने किसी और हवा दे दी है।

ओवैसी ने दिल्ली में कहा कि सरकार ने कृषि क़ानूनों को रद्द करने का फ़ैसला देरी से लिया है। यह किसान आंदोलन और किसानों की सफलता है। चुनाव में जाना था इसलिए केंद्र सरकार ने यह फ़ैसला लिया है। वह दिन भी दूर नहीं है, जब मोदी सरकार CAA का क़ानून भी वापस लेगी।

जुलेखा अफजल खान ने ट्वीटर पर लिखा है कि हमने भी महीनों सड़कों पर लड़ाई लड़ी है और हमारे कितने क्रांतिकारी जेल में हैं। हर एक को रिहा किया जाना चाहिए और यह काला कानून सीएए (CAA,NRC) एनआरसी भी वापस लिया जाना चाहिए।

आरफा खानम शेरवानी ने ट्वीट किया कि मोदी जी, आपको एक और माफ़ी माँगनी है। CAA व NRC का विरोध करने वाले भी इसी देश के नागरिक है।CAA व NRC वापस लीजिये। हर उस व्यक्ति को रिहा कीजिये जो ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से UAPA के तहत जेल में डाला गया। यही आपकी असली तपस्या होगी।

हालांकि, तोप सिंह चौरसिया ने ट्वीट कर लिखा कि तीन कृषि कानून वापस होने से कुछ लोगों के मन में लड्डू फूट रहे हैं, उन्हें लगता है कि अब सीएए, एनआरसी और धारा 370 के लिए सरकार को झुका सकते हैं। याद रखना किसान का मुद्दा अलग है और सीएए व एनआरसी मुद्दा अलग है।

केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि विपक्ष को इस फ़ैसले का स्वागत करना चाहिए। तीनों कृषि क़ानून वापस लेने के बाद विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं है। विपक्ष सोच रहा है कि कृषि क़ानून वापस हो गए तो CAA-NRC भी वापस हो जाएगा। CAA-NRC वापस करने की मांग जो कर रहे हैं, वे गलतफहमी के शिकार हैं।

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