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उत्तरी, मेजा, फूलपुर, बारा में भाजपा बदलेगी प्रत्याशी ?

विधानसभा चुनाव-2022 की तैयारियों के दौरान हार-जीत और दगाबाजी पर कयासबाजी तेज

प्रयागराजः विधानसभा चुनाव-2022 सिर पर सवार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह के ताबड़तोड़ यूपी दौरे ने यह संभावना बढ़ा दी है कि दिसंबर के अंत तक नए रण का ऐलान हो सकता है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और सरकारी मशीनरी ने भी सूरज के सातों घोड़े खोल दिए हैं। प्रदेशभर में चुनावी समर के बीच प्रयागराज में अन्य राजनीतिक दलों के साथ ही सत्ताधारी भाजपा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर संभावनाओं और आशंकाओं के बादल प्रतिदिन कट-छंट रहे हैं। सर्वाधिक चर्चा के केंद्र में महानगर की तीन सीटों में उत्तरी है, जहां हर्षबर्धन वाजपेयी विधायक हैं। मेजा, फूलपुर और बारा विधानसभाओं को लेकर भी उतार-चढ़ाव की गणित है।

प्रयागराज उत्तरी से विधायक हर्षबर्धन वाजपेयी, फूलपुर विधायक प्रवीण पटेल और बारा विधायक डॉ अजय भारती 2017 विधानसभा चुनाव के ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को छोड़कर भगवा दल का हिस्सा बने और जीत दर्ज की। मेजा विधायक नीलम करवरिया, नैनी जेल में सजा काट रहे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की पत्नी हैं। इन चारों में सिर्फ नीलम ही ऐसी विधायक हैं जो पुराने भाजपा परिवार का हिस्सा हैं। प्रयागराज में शहर दक्षिणी से बसपा, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में पहुंचे नंद गोपाल गुप्ता नंदी और पश्चिमी से सिद्धार्थनाथ सिंह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। कोरांव और फाफामऊ में भी भाजपा विधायक हैं। राजनीतिक गलियारे में जैसी चर्चा है, उसके अनुसार दक्षिणी और पश्चिमी सीटों पर प्रत्याशी बदलने की संभावना न्यूनतम है। इसके अलावा जिले की अन्य एक भी विधानसभा सीट ऐसी नहीं है, जहां प्रत्याशियों के विकल्प पर चर्चाएं न हों। दो महीने पहले नैनी में हुए भाजपा विचार मंथन से जो रस निकला, वह वर्तमान विधायकों के लिए चिंता का सबब बन गया है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में लखनऊ में संगठन के एक बड़े नेता से मिलने पहुंचे कुछ विधायकों को बातों ही बातों में संकेत भी मिल चुके हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि विचार मंथन के बाद शहर उत्तरी की सीट सर्वाधिक चर्चा में इसलिए भी है, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में इसे भाजपा की जीत के लिए सर्वाधिक सुरक्षित माना जा रहा है। पिछले चुनाव में मौजूदा विधायक हर्षबर्धन वाजपेयी को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक शिक्षक, जो एक बड़े विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं, अपने बेटे को विधायक बनते देखने का न सिर्फ सपना पाल चुके हैं, बल्कि भरपूर प्रयास भी कर रहे हैं। ऐसी भी चर्चा है कि भाजपा के बड़े नेताओं के पास यह अपडेट भी है कि वर्तमान विधायक टिकट कटने की आशंका मजबूत होते ही साइकिल की सवारी भी कर सकते हैं। हालांकि, विधायक वाजपेयी लोगों के बीच लगातार इसे अफवाह बताकर खारिज कर रहे हैं।

फूलपुर और बारा विधायकों के टिकट बदलने की चर्चाएं उनकी निष्क्रियता की वजहों से है। प्रवीण पटेल प्रयागराज के इकलौते ऐसे विधायक माने जाते हैं जो अपनी ही सरकार में धरने पर बैठ चुके हैं। हालांकि, प्रवीण और डॉ भारतीय ने पिछले कुछ दिनों में भाजपा कार्यक्रमों में सक्रियता बनाई है। मेजा विधायक नीलम करवरिया की घेराबंदी इस तर्क के साथ की गई है कि जिला पंचायत चुनाव में बतौर विधायक वह एक भी प्रत्याशी को जीत नहीं दिला सकीं। फिलहाल, माना यह जा रहा है कि भाजपा प्रयागराज में आठ विधायकों में से तीन के टिकट काटकर नए प्रत्याशी को चुनाव लड़ा सकती है। टिकट वितरण होने के दौरान तमाम कवायदें अंतिम वक्त में बदल जाती हैं। इसलिए, कुछ भी हो सकता है और किसी को भी टिकट मिल सकता है।

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