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17 हजार करोड़ खर्च कर 8 वर्षों में 157 मेडिकल कॉलेज को मंजूरी

दिल्ली। कोरोना महामारी के दौरान और उसके बाद भी देश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर अक्सर यह सवाल उठाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे के सुधार के लिए सरकार कुछ नहीं किया। ऐसे ही सवालों के दनदनाते हुए तीर एक आरटीआई के जरिए भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछे गए हैं। जवाब में मंत्रालय ने कहा है कि 2014 के बाद केंद्र सरकार ने 157 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी। साथ ही इन्हें तेजी से बनाने के लिए भी भारी भरकम रकम खर्च की है।

स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार ने 2014 से अब तक देश में 157 नए मेडिकल कॉलेज खोलने को मंजूरी दी है। यह मेडिकल कॉलेज उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैले हुए हैं। इस पर कुल 17691.08 करोड़ रूपये खर्च किए गए हैं।

एक आरटीआई का जवाब देते हुए केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि इन चिकित्‍सा संस्‍थानों को केंद्र पोषित योजना के अंतर्गत स्‍वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्‍त देश में राज्‍यों और केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों को बढ़ाने के लिए 2014 से लगभग 2451 करोड़ रूपये प्रदान किए गए हैं।

नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्‍ता ने पिछले दस सालों में सरकार द्वारा प्रदान की गई सहायता और देश में मौजूद मेडिकल कॉलेजों के बारे में पूछा था।

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में पहुंच रहे हैं। यहां से वह सूबे में बनाए गए सात नए मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन करेंगे। यह मेडिकल कॉलेज बनकर पूरी तरह तैयार हैं। इन सभी में इसी सत्र से एमबीबीएस की 100-100 सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश भी दिया जाएगा। इससे सूबे में 700 मेडिकल सीटें एक ही सत्र में बढ़ जाएंगी। इससे ज्यादा विद्यार्थियों को एमबीबीएस में प्रवेश का मौका मिल सकेगा। 

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