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ई-कामर्स कंपनियों के खिलाफ कैट का हल्ला बोल, 500 शहरों में प्रदर्शन

प्रयागराजः देश में तेज़ी से बड़ते ई-कामर्स व्यापार को अपनी बपौती बनाने के कुत्सित इरादों को लेकर बड़ी विदेशी ई-कामर्स कम्पनियों द्वारा सरकार की नाक के ठीक नीचे देश के क़ानूनों एवं नियमों के घोर उल्लंघन के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाईं का आह्वान किया है। साथ ही केंद्र सरकार से उपभोक्ता क़ानून में प्रस्तावित नियमों को तत्काल लागू करने की माँग को लेकर कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ ( कैट) ने 15 सितंबर से देश भर में एक महीने का “ ई कामर्स पर हल्ला बोल “ राष्ट्रीय अभियान शुरू किया। इसके अंतर्गत दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों के 500 से अधिक शहरों में कैट के बैनर तले स्थानीय व्यापारी संगठनों ने अपनी माँगों को लेकर धरने दिए। हल्ला बोल अभियान की इस शृंखला में आगामी 23 सितम्बर को देश के सभी ज़िला कलेक्टरों को कैट के प्रतिनिधिनिधि मण्डल प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन देंगे ।

कैट के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल एवं वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विभु अग्रवाल ने कहा कि आज देश के कोने कोने में आयोजित धरनों ने यह सिद्ध कर दिया की बड़ी विदेशी ई कामर्स कम्पनियों के मोनोपॉली व्यापार मौडल के ख़िलाफ़ अब देश भर का व्यापारी लामबंद हो चुका है। इन कम्पनियों द्वारा किए का रहे क़ानून रव नियमों के उल्लंघन को और अधिक बर्दाश्त नहीं करेगा।

दोनो नेताओं ने इन विदेशी ई-कामर्स कम्पनियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वो अब 1857 का भारत न समझें और अपने आपको ईस्ट इंडिया कम्पनी का दूसरा संस्करण बनाने का विचार त्याग दें। यह 2021 का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला भारत है, जिसमें देश के व्यापारी विदेशी कम्पनियों को मुँह तोड़ जवाब देना जानते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नीति आयोग. उद्योग संगठन समेत उनके जितने भी भौंपू उनके हितों की रक्षा के लिए उनकी ही भाषा बोल रहे हैं, समय आने पर व्यापारी उनका भी पर्दाफ़ाश करेंगे। जिस प्रकार से विदेशी ई कामर्स कम्पनियों ने अपनी मनमानी, बेइमानी एवं नियमों का उल्लंघन किया है, उसके कारण देश में ख़ास तौर पर मोबाइल, किराना, एफएमसीजी आदि वस्तुओं की लाखों दुकानें बंद हुई हैं। व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, उसके दर्द से देश भर का व्यापारी आहत है। अब इससे अधिक व्यापारी बर्दाश्त नहीं करेंगे और जब तक सरकार ई कामर्स के नियम लागू नहीं करती है और ई कामर्स व्यापार को विदेशी कम्पनियों के कुटिल चंगुल से मुक्त नहीं करती है, तब तक देश भर में व्यापारी एक आक्रामक अभियान चलाते रहेंगे।

कंप्यूटर व्यापारी अनु पांडेय ने कहा कि यदि सरकार ई कामर्स व्यापार को पारदर्शी और व्यवस्थित करने के लिए नियम ला रही है तो विदेशी ई कामर्स कम्पनियों और उनके भोपुओं के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? प्रस्तावित नियमों के अंतर्गत प्रत्येक ई कामर्स कम्पनी के लिए आवश्यक पंजीकरण, सम्बंधित कम्पनियों द्वारा अपने मार्केट प्लेस पर सामान की बिक्री पर रोक तथा नोडल ऑफ़िसर अथवा शिकायत ऑफ़िसर का गठन क्या जायज़ नहीं है ? कौन नहीं जानता की अमेज़न अपनी सम्बंधित कम्पनी क्लाउडटेल, जिसके मालिक श्रीनारायण मूर्ति हैं, के ज़रिए अधिकांश माल की बिक्री करता है। यह भी समझ में नहीं आता की नीति आयोग क्यों अनीति का साथ दे रहा है ? आज भी जब विदेशी कम्पनियाँ देश के क़ानूनों का उल्लंघन कर रही है तब उनको कहने के बजाय नीति आयोग उपभोक्ता मंत्रालय के विवेक और अधिकार को चुनौती दे रहा है?

सुबह से लगातार बारिश होने के कारण कार्यक्रम इंदिरा भवन प्रांगण में सम्पन्न किया गया। प्रदर्शन में महेन्द्र गोयल, विभु अग्रवाल, अनु पाण्डेय, शेखर शुक्ला, नीरज शर्मा, आशीष केसरी, नरेश नारंग, मनोज अग्रवाल, दिनेश केसरवानी, सौरभ अग्रवाल, आशु, राजू, मेहबूब, संजय, पप्पू सहित तमाम व्यापारी मौजूद रहे।