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वैश्विक भाषा की ओर बढ़ी हिन्दी – आचार्य कृपाशंकर

प्रयागराज: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष आचार्य कृपाशंकर पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी धीरे धीरे वैश्विक परिदृश्य को प्राप्त कर रही है। यह बोलियों के संघात से बनी है। भारत विकास परिषद, प्रयाग शाखा की ओर से आयोजित हिन्दी दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि भारतेंदु ने हिन्दी के नई चाल में ढली होने की घोषणा की थी और उसके बाद से लगातार मानवीय चेतना के वाहक के रूप में और देश की भावनाओं की अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में हिन्दी सोपानक्रमिक विकास को प्राप्त हो रही है।

उन्होंने कहा कि हिन्दी में आत्मसातीकरण की अद्भुत क्षमता है। हमें “शक्तिशाली हो विजयी बनो, विश्व में गूंज रहा जयगान” के संदेश के अर्थ को जरूर ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने “निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल” कहते हुए कहा कि बिना निज भाषा के दुनिया में कोई भी जाति गौरव और श्रेष्ठता बोध को प्राप्त नहीं कर सकती।

कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अल्पना अग्रवाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं के लिए संजीवनी लेकर आई है। हमारा ईमानदारी भरा प्रयत्न भारत को विश्व में स्थान दिलाएगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने कहा की भाषा हृदय की अभिव्यक्ति का साधन है, यह जितनी समर्थ होगी, कला और विज्ञान में हमारे मन की अभिव्यक्ति उतनी ही सुंदर होगी।

धन्यवाद ज्ञापन भारत विकास परिषद के वरिष्ठ सदस्य श्रीमान जी. के. खरे जी ने किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में हिन्दी साहित्य सम्मेलन, हिंदुस्तानी एकेडमी और विज्ञान परिषद का संदर्भ देते हुए हिन्दी के विकास में इलाहाबाद के योगदान पर प्रकाश डाला।